गाजीपुर में महिला ने लगाया मारपीट, गाली गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप, दस हजार रुपये बकाया नहीं देने की भी शिकायत

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गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक महिला की शिकायत का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता सुशीला चौहान पत्नी प्रकाश चौहान ने कुछ लोगों पर गाली गलौज करने, मारपीट की कोशिश करने, मुंह में हाथ डालकर आवाज दबाने का प्रयास करने और परिवार को जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके दस हजार रुपये बकाया हैं, जिन्हें संबंधित लोग वापस नहीं कर रहे हैं। पीड़िता ने अपनी शिकायत में पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, घटना 9 दिसंबर 2024 को सुबह करीब 10 बजे की बताई गई है। सुशीला चौहान ने अपनी शिकायत में पदासरी चौहान उर्फ शिवनाथ चौहान, भग्गुन चौहान, श्यामा नारायण चौहान और एक अन्य व्यक्ति का नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि उनके साथ गाली गलौज की गई और मुंह में हाथ डालकर आवाज बंद करने की कोशिश की गई। महिला के मुताबिक, घटना के दौरान वह भयभीत हो गई और उसे अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी।

दस हजार रुपये बकाया होने का भी आरोप पीड़िता ने अपनी शिकायत में दस हजार रुपये की बकाया राशि का भी जिक्र किया है। उसका आरोप है कि संबंधित व्यक्ति उसके पैसे वापस नहीं कर रहा है। महिला की शिकायत के मुताबिक, रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद बना हुआ है। हालांकि, बकाया राशि किस कारण से है और इस विवाद के पीछे पूरी परिस्थितियां क्या हैं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

इकलौते बेटे को धमकी देने का आरोप सुशीला चौहान ने आरोप लगाया है कि उनके करीब 25 वर्षीय इकलौते बेटे दीपक चौहान को भी जान से मारने की धमकी दी जाती है। महिला का कहना है कि उसके परिवार को खत्म करने की धमकी मिलने से पूरा परिवार डरा हुआ है। पीड़िता ने प्रशासन से अपने बेटे और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

प्रशासन से न्याय की गुहार शिकायतकर्ता सुशीला चौहान ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित घटना की सच्चाई सामने लाने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। महिला चाहती है कि उसके बकाया रुपये के विवाद की भी जांच हो और परिवार को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचने से पहले उचित कदम उठाए जाएं।

अब इस मामले में संबंधित पक्षों का बयान और पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों को जांच के बाद ही प्रमाणित माना जा सकता है।

पीड़िता की प्रशासन से अपील है कि उसकी शिकायत को गंभीरता से लेकर मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि धमकी या मारपीट के आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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