समस्तीपुर | उजियारपुर
बिहार के समस्तीपुर जिले थाना उजियारपुर गांव अकाहां रायपुर से एक सनसनीखेज और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक 23 वर्षीय विवाहिता रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई है। घटना के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। आर्थिक तंगी के कारण परिजन हर जगह खोजबीन करने में भी असमर्थ हैं और अब उन्होंने मीडिया के माध्यम से लोगों से मदद की गुहार लगाई है।
मामला उजियारपुर थाना क्षेत्र के गांव ए कहां रायपुर का है। शिकायतकर्ता राजाराम सरदार महतो जिला समस्तीपुर के रहने वाले हैं। राजाराम पिता सरवन महेतो ने बताया कि उनकी बहन काजल कुमारी (उम्र 23 वर्ष), जिनकी शादी विकास कुमार से हुई थी, दिल्ली में पति के साथ रहती थीं। पति-पत्नी के साथ उनका 5 वर्षीय बेटा रितिक कुमार भी रहता था।
राजाराम के अनुसार, घटना 24 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 10 बजे की है। काजल कुमारी घर से बाहर निकली थीं, उस समय उनका बेटा रितिक उनके पीछे-पीछे आ रहा था। इसी दौरान काजल ने बच्चे को थप्पड़ मारते हुए कहा कि “मैं अभी घर में आ रही हूं।” इसके बाद वह घर से चली गईं। जाते समय वह अपना मोबाइल फोन और आधार कार्ड भी साथ ले गई थीं, जो मोबाइल कवर में रखा हुआ था।
परिजनों का कहना है कि इसके बाद से काजल कुमारी का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है। उनका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है। रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित स्थानों पर काफी खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। परिवार का कहना है कि काजल की मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य थी और इससे पहले कभी इस तरह की कोई घटना नहीं हुई थी। वह ज्यादा पढ़ी-लिखी भी नहीं है।
भाई राजाराम का कहना है कि वे लगातार बहन की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन गरीब परिवार होने के कारण हर जगह जाकर ढूंढ पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है। घर वालों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और मासूम बच्चे की हालत भी बेहद दयनीय है, जो मां को लगातार याद कर रहा है।
परिजनों ने अब मीडिया के माध्यम से आम जनता और प्रशासन से मदद की अपील की है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को काजल कुमारी के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो वह तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दे, ताकि समय रहते युवती का पता लगाया जा सके।
यह मामला न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि लापता मामलों में गरीब परिवारों को किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब परिजनों की आखिरी उम्मीद प्रशासन और समाज से सहयोग की है।

