जैसलमेर में गायों के साथ क्रूरता और अवैध कब्जे का गंभीर आरोप, वीडियो बनाकर भ्रामक प्रचार; पुलिस से FIR की मांग

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जैसलमेर।

राजस्थान के जैसलमेर जिले के सांगड़ थाना क्षेत्र से गौवंश के साथ क्रूरता, अवैध परिवहन और सरकारी चारागाह भूमि पर कब्जे का एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम नेडान निवासी तनेरावसिंह पुत्र भीमसिंह राजपूत ने पुलिस थाना सांगड़ में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी पालतू गायों को साजिश के तहत खेत में फंसाकर पीटा गया, वीडियो बनाकर भ्रामक प्रचार किया गया और बाद में जबरन वाहन में भरकर गौशाला में छोड़ा गया।

शिकायत के अनुसार, कुछ दिन पहले प्रार्थी की 17 गायें अचानक लापता हो गईं। खोजबीन करने पर पता चला कि वे पास के खेत की दिशा में गई थीं, जो ग्राम दवाड़ा निवासी चौथाराम पुत्र घुडाराम रावणा राजपूत एवं तनेरावसिंह पुत्र खेतसिंह राजपूत का बताया जा रहा है। आरोप है कि खेत का मुख्य गेट जानबूझकर खुला छोड़ा गया, जिससे गायें अंदर चली गईं। इसके बाद गायों का वीडियो बनाया गया और उन्हें खेत से बाहर निकालने के दौरान ट्रैक्टर को तेज गति से दौड़ाया गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि ट्रैक्टर के पीछे भगाने से एक-दो गायें गिर गईं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। बाद में जब गायें गौशाला में मिलीं तो उनके पैरों पर दबाव और फ्रैक्चर जैसे निशान पाए गए। इससे आशंका जताई जा रही है कि गायों के पीछे भारी वाहन चलाया गया। स्थिति बिगड़ने के डर से गायों को किसी वाहन में भरकर वहां से हटा दिया गया।

करीब 10 दिन बाद प्रार्थी की कुछ गायें भादरिया स्थित एक गौशाला में मिलीं, लेकिन गौशाला प्रशासन स्पष्ट नहीं कर सका कि गायों को किसने, किस वाहन से और किसके निर्देश पर वहां छोड़ा। आरोप है कि गौशाला कर्मचारियों ने न तो सीसीटीवी फुटेज दिखाई और न ही किसी प्रकार का वाहन या व्यक्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया। जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गायें एक साथ बड़ी संख्या में लाई गई थीं, जिससे वाहन द्वारा परिवहन की संभावना और मजबूत होती है।
गौशाला में यह भी सामने आया कि गायें स्पष्ट रूप से पालतू थीं और उनके शरीर पर पुराने व ताजे चोट के निशान मौजूद थे। प्रार्थी का आरोप है कि जानबूझकर गायों को अलग-अलग बाड़ों में रखा गया और एक गाय की मौत की सूचना भी नहीं दी गई। कुल 17 गायों में से एक गाय अभी भी बीमार है, दो गायें लापता हैं और शेष किसी तरह वापस मिली हैं।
मामले में एक और गंभीर पहलू यह है कि घटनास्थल के आसपास सरकारी चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि चारागाह भूमि गौवंश और पशुधन के लिए आरक्षित होती है, ऐसे में वहां खेती करना कानून और जनहित दोनों के खिलाफ है। इस संबंध में राजस्व विभाग से भी जांच की मांग की गई है।

तनेरावसिंह ने आरोप लगाया है कि इस पूरे घटनाक्रम में चौथाराम पुत्र घुडाराम रावणा राजपूत और तनेरावसिंह पुत्र खेतसिंह राजपूत की अहम भूमिका है तथा उनके साथ 7-8 अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पीड़ित ने पुलिस से मांग की है कि गौवंश के साथ क्रूरता, अवैध परिवहन, भ्रामक प्रचार और सरकारी भूमि पर कब्जे के इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष, गहन और समयबद्ध जांच की जाए।

 

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