हरिद्वार में 16 वर्षीय नाबालिग की शादी की तैयारी से मचा हड़कंप, चार महीने की गर्भवती होने का दावा, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

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हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के हथिया थल क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है जिसने बाल विवाह रोकने के सरकारी दावों और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि क्षेत्र की रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी शिखा की शादी की तैयारियां चल रही हैं, जबकि उसकी उम्र कानूनी विवाह आयु से कम बताई जा रही है। इतना ही नहीं, यह भी दावा किया जा रहा है कि किशोरी करीब चार महीने की गर्भवती है।

मामले के अनुसार, जिस युवक से शादी कराई जा रही है उसका नाम मुकुल बताया जा रहा है और उसकी उम्र लगभग 21 वर्ष होने का दावा किया जा रहा है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल बाल विवाह तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि नाबालिग के संरक्षण, यौन अपराधों और संबंधित अन्य कानूनों के तहत भी गंभीर जांच का विषय बन सकता है।

भारत में बाल विवाह कानूनन अपराध है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अनुसार लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके बावजूद यदि किसी नाबालिग की शादी कराई जाती है तो शादी कराने वाले अभिभावकों, सहयोग करने वालों तथा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

यदि किसी 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के गर्भवती होने का दावा सही पाया जाता है, तो मामले की जांच संबंधित कानूनों, विशेषकर बच्चों के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत भी की जा सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस, बाल कल्याण समिति, जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन को इस मामले की जानकारी होने के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह बाल विवाह रोकने के सरकारी अभियान पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा। लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल शादी रुकवाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि नाबालिग इस स्थिति तक कैसे पहुंची और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

हालांकि, इस मामले में अभी तक प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है। साथ ही, किशोरी के गर्भवती होने और उसकी उम्र संबंधी दावों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं हो सका है।

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की जाएगी कि वे तत्काल मामले की निष्पक्ष जांच कर बाल विवाह रुकवाएं, किशोरी की सुरक्षा सुनिश्चित करें और कानून के अनुसार दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करें।

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