बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले के मेहसी थाना क्षेत्र स्थित रंगरेज छपरा गांव में पुश्तैनी जमीन को लेकर वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर गहरा गया है। मामला अब इतना बढ़ चुका है कि प्रशासन को दोनों पक्षों पर शांति भंग की आशंका में धारा 126 बी.एन.एस.एस. के तहत कार्रवाई की अनुशंसा करनी पड़ी है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि न्यायालय से आदेश मिलने और जमाबंदी कायम होने के बावजूद उन्हें अब तक जमीन पर दखल-कब्जा नहीं मिल पाया है।
जानकारी के अनुसार, गांव निवासी नवल किशोर राय, अवधेश राय और उपदेश कुमार राय ने आरोप लगाया है कि उनके दादा स्वर्गीय फिरंगी राय की संयुक्त पुश्तैनी संपत्ति में उनका वैधानिक हिस्सा होने के बावजूद विपक्षी पक्ष ने वर्षों पहले कथित रूप से उन्हें वंशावली से बाहर दिखाकर पूरी जमीन पर कब्जा कर लिया। आरोप है कि फिरंगी राय के दो पुत्र थे—अच्छेलाल राय और रामाश्रय राय। लेकिन बाद में रामाश्रय राय और उनके वारिसों को रिकॉर्ड से हटाकर जमीन का बंटवारा कर लिया गया।
दस्तावेजों के अनुसार, रामाश्रय राय के पुत्र स्वर्गीय मोहन लाल राय के परिवार को पहले पंचायत के माध्यम से भरण-पोषण के लिए कुछ जमीन दी गई थी। इसी आधार पर भूमि सुधार उप समाहर्ता चकिया की अदालत ने वर्ष 2012-13 में फैसला सुनाते हुए माना कि मोहन लाल राय का परिवार भी फिरंगी राय का वैध वंशज है और संयुक्त संपत्ति में उनका बराबर का अधिकार बनता है।
अदालत ने अपने आदेश में अंचलाधिकारी मेहसी को निर्देश दिया था कि आवेदक पक्ष के नाम आधी जमीन की जमाबंदी कायम कर स्थानीय थाना के सहयोग से दखल कब्जा दिलाया जाए। इसके बाद आवेदक नवल किशोर राय और उनके भाइयों के नाम जमाबंदी भी कायम कर दी गई। बावजूद इसके आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने जमीन खाली नहीं की और विवाद लगातार बढ़ता चला गया।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि खाता संख्या 13, 15 और 40 की कई खेसरा जमीनों पर विपक्षी सूर्य नारायण राय, सुदीश नारायण राय और संजय राय द्वारा जबरन कब्जा कर मकान निर्माण की कोशिश की जा रही है। जब इसका विरोध किया जाता है तो गाली-गलौज और मारपीट की स्थिति बन जाती है।
मामले की जांच में पहुंचे पुलिस अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि गांव में दोनों पक्षों के बीच काफी तनाव बना हुआ है और कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी जांच के दौरान बताया कि विवाद को लेकर माहौल लगातार खराब हो रहा है और कई बार समझाने के बावजूद विवाद खत्म नहीं हो रहा।
अंचल कार्यालय की ओर से दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर मूल कागजात के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्वेच्छा से आदेश का पालन नहीं किया गया तो बल प्रयोग कर दखल-कब्जा दिलाया जा सकता है।
गांव में यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब अदालत ने वर्षों पहले फैसला सुना दिया और जमाबंदी भी कायम हो गई, तो अब तक पीड़ित परिवार को जमीन पर अधिकार क्यों नहीं मिल पाया। वहीं पीड़ित पक्ष न्याय और सुरक्षा की मांग को लेकर लगातार प्रशासन के चक्कर काट रहा है।

