मुजफ्फरपुर (कटरा)।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कटरा प्रखंड अंतर्गत ग्राम उफरौली में सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। जरा-सी बारिश होते ही गांव की कच्ची सड़क पानी से लबालब भर जाती है, जिससे पूरा इलाका टापू में तब्दील हो जाता है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। गांव के रहने वाले संतोष कुमार, आत्मज किशन सहनी, ने इस गंभीर समस्या को लेकर अपनी पीड़ा सामने रखी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सड़क निर्माण की गुहार लगाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है। बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है, बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना चुनौती बन जाता है और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार तो एंबुलेंस और अन्य जरूरी वाहन गांव तक पहुंच ही नहीं पाते, जिससे जान जोखिम में पड़ जाती है।
संतोष कुमार ने बताया कि सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। हर चुनाव में सड़क बनाने का वादा किया जाता है, मगर बरसात आते ही वही पुरानी तस्वीर सामने आ जाती है—कीचड़, पानी और मजबूरी।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क न होने से गांव का विकास पूरी तरह ठप हो गया है। किसान अपनी उपज बाजार तक नहीं ले जा पाते, मजदूर काम पर नहीं पहुंच पाते और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें थोड़ी-सी जरूरत के लिए भी भारी जोखिम उठाना पड़ता है।
अब हताश होकर ग्रामीणों ने देश के शीर्ष नेतृत्व से उम्मीद लगाई है। संतोष कुमार का कहना है कि “अगर हमारी आवाज ऊपर तक पहुंच जाए तो शायद इस गांव की किस्मत बदल जाए। हम सिर्फ पक्की सड़क चाहते हैं, ताकि बारिश में भी सम्मान से जी सकें।”
यह मामला एक बार फिर ग्रामीण बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक उदासीनता और विकास के दावों की हकीकत पर सवाल खड़े करता है। देखना यह है कि उफरौली गांव की यह पुकार कब तक अनसुनी रहती है, या फिर किसी दिन सच में सड़क बनकर गांव की तकदीर बदलती है।

