वसई-विरार क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के लापता होने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। गोखिवरे के जानकी पाडा निवासी संगिता कमलेश राजभर ने आरोप लगाया है कि उनकी नाबालिग बेटी चांदनी करीब दो महीने से लापता है और मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक उसे सुरक्षित बरामद कर परिवार के सुपुर्द नहीं किया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार पुलिस अधिकारियों और थाने के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है।
परिवार की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार, वालीव पुलिस स्टेशन में नाबालिग के लापता होने को लेकर FIR नंबर 0404 दर्ज कराई गई थी। शिकायत में एफआईआर की तारीख 16 जून 2026 बताई गई है। मां का आरोप है कि पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में उनकी बेटी को तलाशने के लिए कार्रवाई की थी और वहां उसके मिलने की जानकारी भी सामने आई थी।
परिवार का आरोप है कि उत्तर प्रदेश से नाबालिग को वापस लाते समय पुलिस की कथित लापरवाही के कारण वह दोबारा पुलिस की निगरानी से निकल गई। मां का कहना है कि इस घटना के बाद से परिवार लगातार परेशान है और उन्हें बेटी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
शिकायतकर्ता ने वालीव पुलिस स्टेशन के एक हवलदार विश्वनाथ भोये और एक महिला पुलिसकर्मी के उत्तर प्रदेश जाने का भी उल्लेख किया है। परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस की कथित लापरवाही के कारण नाबालिग को सुरक्षित तरीके से वापस नहीं लाया जा सका। हालांकि, नाबालिग के साथ किसी अपराध या यौन अपराध के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि नाबालिग की बरामदगी के बाद उसे कानून के अनुसार सुरक्षित संरक्षण और परिवार को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी। परिवार ने मामले में नाबालिग की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए POCSO कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
परिवार के अनुसार, 22 जुलाई को भी नाबालिग को पुलिस द्वारा पकड़े जाने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में वह कथित तौर पर पुलिस के हाथ से फिर निकल गई। परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद से वे लगातार अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं हो रही है।
मां का आरोप है कि पुलिसकर्मियों की ओर से उन्हें कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया गया कि लड़की खुद चली गई और परिवार को पुलिस के खिलाफ जो करना है करने की बात कही गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
शिकायत में नाबालिग की उम्र को लेकर भी अंतर दिखाई देता है। आवेदन में बेटी की उम्र 15 वर्ष बताई गई है, जबकि परिवार के मौखिक बयान में उसकी उम्र 13 वर्ष बताई गई है। ऐसे में उसकी वास्तविक उम्र की पुष्टि दस्तावेजों के आधार पर होना महत्वपूर्ण होगा।
परिवार ने अधिकारियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए नाबालिग को जल्द से जल्द तलाशा जाए, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका या पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। मां का कहना है कि बेटी के लापता होने के बाद से पूरा परिवार मानसिक तनाव में है और अब उन्हें केवल अपनी बेटी की सुरक्षित बरामदगी का इंतजार है।

