मुंगेर (बिहार)। मुंगेर जिले के जमालपुर क्षेत्र अंतर्गत एक गांव से बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं। खुद को पीड़ित बताते हुए रविश कुमार ने सोशल मीडिया और पत्रों के माध्यम से दावा किया है कि वर्षों से एक संगठित गिरोह द्वारा नाबालिग बच्चियों के साथ यौन शोषण, मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न और कथित “हैकिंग/कंट्रोल सिस्टम” के जरिए डराने-धमकाने की घटनाएं की जा रही हैं।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस मामले में कई बार प्रशासन को पत्र भेजे गए, लोक शिकायत के जरिए भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोपों में यह भी दावा किया गया है कि तीन साल की बच्ची के साथ अत्याचार की घटना हुई और स्थानीय स्तर पर दबाव, धमकी व डर का माहौल बनाया गया। पीड़ित ने कुछ स्थानीय लोगों पर संरक्षण देने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।
पुलिस-प्रशासन से अपील
रविश कुमार ने राज्य व केंद्र सरकार से निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच (मेडिकल, डिजिटल/तकनीकी, कॉल-डाटा, सोशल मीडिया व पत्राचार) कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
क्या है पूरा मामला
सोशल मीडिया पर “आतंकवादी रक्षा तंत्र” के दावे, मुंगेर में गंभीर आरोप; उच्चस्तरीय जांच की मांग
मुंगेर जिले के जमालपुर क्षेत्र अंतर्गत एक गांव से सामने आए गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। खुद को पीड़ित बताते हुए रविश कुमार ने सोशल मीडिया और पत्राचार के माध्यम से दावा किया है कि वर्षों से एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसे वह “आतंकवादी रक्षा/कंट्रोल सिस्टम” के रूप में वर्णित करते हैं। उनके अनुसार, यह तंत्र कथित तौर पर डराने-धमकाने, डिजिटल निगरानी/हैकिंग और मानसिक दबाव के जरिए लोगों को नियंत्रित करता है।
गंभीर आरोप और संवेदनशील दावे
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस नेटवर्क के चलते नाबालिगों के साथ यौन शोषण, मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न और सबूतों से छेड़छाड़ जैसी घटनाएं हुईं। दावा किया गया कि एक तीन वर्षीय बच्ची के साथ अत्याचार की घटना भी सामने आई, जबकि स्थानीय स्तर पर दबाव और भय का माहौल बनाकर शिकायतों को दबाने का प्रयास किया गया।
प्रशासन तक पहुंची शिकायतें, कार्रवाई पर सवाल
रविश कुमार का कहना है कि उन्होंने प्रशासन को कई बार पत्र भेजे, लोक शिकायत माध्यम से भी मामला दर्ज कराया, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कुछ स्थानीय लोगों पर कथित संरक्षण देने और जांच को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं।
निष्पक्ष व वैज्ञानिक जांच की मांग
पीड़ित पक्ष ने राज्य व केंद्र सरकार से स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मांग में मेडिकल परीक्षण, डिजिटल/तकनीकी फॉरेंसिक, कॉल-डाटा रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और पत्राचार की वैज्ञानिक जांच शामिल है, ताकि तथ्यों की पुष्टि हो सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
प्रशासनिक पक्ष
समाचार लिखे जाने तक पुलिस/प्रशासन की ओर से इन आरोपों की पुष्टि या खंडन में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि लिखित शिकायत और साक्ष्य उपलब्ध कराए जाने पर जांच प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

