दो महीने तक अस्पतालों के चक्कर काटता रहा परिवार, बेटी की हालत बिगड़ने पर छलका पिता का दर्द; इलाज व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

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गिरिडीह/धनबाद/देवघर (झारखंड)। झारखंड के गिरिडीह जिले के तीसरी थाना क्षेत्र के जमुनियाटांड़ गांव निवासी राजकुमार शर्मा, पिता देवकी नंदन शर्मा, ने अपनी 21 वर्षीय बेटी उर्वशी के इलाज को लेकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि पिछले करीब दो महीनों से बेटी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और उसे बेहतर इलाज दिलाने के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन समय पर संतोषजनक उपचार नहीं मिल सका।

पीड़ित परिवार के अनुसार सबसे पहले बेटी का इलाज स्थानीय स्तर पर कराया गया। इसके बाद उसे धनबाद के असरफी हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन वहां भी अपेक्षित लाभ नहीं मिला। बाद में परिवार उसे देवघर स्थित एम्स लेकर पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि वहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी और डॉक्टरों ने घर ले जाकर देखभाल करने की सलाह दी। इससे पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट गया।

राजकुमार शर्मा का कहना है कि इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और बेटी को एक अन्य अस्पताल में भर्ती कराया, जहां लगातार इलाज मिलने से उसकी हालत में लगभग 95 प्रतिशत सुधार हुआ। उनका दावा है कि चिकित्सकों ने भरोसा दिलाया कि यदि कुछ समय और इलाज जारी रहा तो बेटी पूरी तरह स्वस्थ हो सकती है। इससे परिवार में एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी।

पीड़ित का आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ा। उनका कहना है कि गंभीर बीमारियों के मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध नहीं होने के कारण गरीब परिवारों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकना पड़ता है। उन्होंने राज्य सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने और गंभीर मरीजों के इलाज की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

हालांकि, अस्पतालों और चिकित्सकों पर लगाए गए आरोप पीड़ित परिवार के दावे हैं। संबंधित अस्पतालों या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की वास्तविक स्थिति सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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