भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर में पायलटों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश में 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) शुरू किए जाएंगे।
नई दिल्ली: देश में एविएशन सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल करते हुए 11 नए फ्लाइंग स्कूल खोलने की योजना है ताकि पायलटों की कमी दूर की जा सके। भारत में एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ा है लेकिन पायलटों की कमी चिंता का विषय है। इस स्थिति से निपटने के लिए देश में 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) शुरू किए जाएंगे। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने फरवरी 2026 में शुरू किए गए ई-टेंडर के तहत सात एयरपोर्ट पर 11 नए FTO स्लॉट की टेंडर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।
अगले 10 साल में 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की जरूरत
सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अनुमान के मुताबिक अगले एक दशक में देश में करी 30 से 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी। वहीं अगले पांच साल में देश की एयरलाइंस कंपनियां अपने बेड़े में करीब 500 नए विमान जोड़ सकती हैं। साथ ही देश में करीब 50 नए एयरपोर्ट विकसित होने की संभावना है। एविएशन सेक्टर के बढ़ने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया अगले 18 महीनों में अपने फ्लीट में 50 से 60 नए हवाई जहाज शामिल करने की तैयारियों में जुटा हुआ है।
41 FTO के 63 फ्लाइंग बेस, घरेलू ट्रेनिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर
अप्रैल 2026 तक देश में DGCA से मंजूर 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) 63 फ्लाइंग बेस से संचालित हो रहे हैं। नए FTO शुरू होने से घरेलू स्तर पर पायलट ट्रेनिंग की क्षमता बढ़ेगी और भारतीय छात्रों को ट्रेनिंग के लिए विदेश जाने की जरूरत कम होगी। इन 11 नए FTO में शुरुआती चरण में 60 से 70 ट्रेनिंग विमान शामिल होने की उम्मीद है। पूरी क्षमता होने पर इनका बेड़ा 110 से 120 विमानों तक पहुंच सकता है। इन संस्थानों से शुरुआत में हर साल 400 से 500 विमानन प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग दी जा सकेगी, जबकि पूरी क्षमता पर यह संख्या करीब 1,500 तक पहुंच सकती है।
CPL जारी होने की संख्या में भी हुआ इजाफा
भारत में पायलट लाइसेंस जारी होने की संख्या में भी लगातार वृद्धि देखी गई है। कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) जारी किए जाने की संख्या 2018 में 640 से बढ़कर 2024 में 1,628 हो गई। हाल के वर्ष में DGCA ने विदेशी संस्थानों से प्रशिक्षण लेने वाले कैडेट्स को 615 CPL जारी किए, जबकि 2,309 स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) भी जारी किए गए। यह देश में पायलट प्रशिक्षण के लिए बढ़ती रुचि और नामांकन को दर्शाता है।
रीजनल एयरपोर्ट पर ट्रेनिंग से छात्रों को मिलेगा फायदा
रीजनल एयरपोर्ट पर शुरू होने वाले नए FTO से पायलट बनने की तैयारी कर रहे छात्रों को अधिक सुलभ और किफायती ट्रेनिंग का विकल्प मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इससे देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल भी सुनिश्चित हो सकेगा। सरकार की यह पहल भारत के तेजी से विस्तार कर रहे एविएशन सेक्टर के लिए जरूरी कुशल मानव संसाधन तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

