नॉन-वेज थाली के मामले में प्याज और गैस की महंगाई के साथ ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने भी इसे ज्यादा महंगा बना दिया।
घर पर तैयार होने वाले वेज खाने की थाली की लागत जुलाई में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढ़ गई। जबकि, नॉन-वेज थाली 9 प्रतिशत महंगी हो गई। मुख्य रूप से प्याज, खाद्य तेल, रसोई गैस और चिकन की कीमतें बढ़ने से इनकी लागत में बढ़ोतरी हुई। क्रिसिल इंटेलिजेंस की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट से पता चला कि जुलाई में वेज थाली की औसत लागत बढ़ने का कारण प्याज के दाम में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। जबकि, खाद्य तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत और रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी
नॉन-वेज थाली के मामले में प्याज और गैस की महंगाई के साथ ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने भी इसे ज्यादा महंगा बना दिया। नॉन-वेज थाली की कुल लागत में लगभग आधा हिस्सा चिकन का होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं क्योंकि बाजार में पुराने स्टॉक के महंगे प्याज की सप्लाई हुई। इसके अलावा, मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल और भंडारण प्रभावित होने से भी सप्लाई पर असर पड़ा।
आलू के दाम सालाना आधार पर 12 प्रतिशत घटे
खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण सप्लाई में बाधाएं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते ऊर्जा कीमतों में तेजी बताया गया। हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट आने से थाली की लागत में बढ़ोतरी कुछ हद तक कम रही। आलू के दाम सालाना आधार पर 12 प्रतिशत और टमाटर के दाम 2 प्रतिशत घटे। बेहतर उत्पादन और ज्यादा बुवाई रकबे के कारण आलू सस्ता हुआ, जबकि टमाटर की कीमतें देरी से बुवाई और जुलाई में ज्यादा आवक की वजह से कंट्रोल में रहीं।
प्याज की कीमतों में 23 प्रतिशत का भारी उछाल
मासिक आधार पर, जुलाई में वेज थाली की लागत जून के मुकाबले 2 प्रतिशत बढ़ी। इसका मुख्य कारण प्याज की कीमतों में 23 प्रतिशत उछाल और आलू के दाम में 4 प्रतिशत बढ़ोतरी रही। हालांकि, टमाटर के दाम में एक प्रतिशत की गिरावट और अन्य वस्तुओं की स्थिर कीमतों ने बढ़ोतरी को सीमित रखा। वहीं, नॉन-वेज थाली की लागत जून के मुकाबले लगभग स्थिर रही, क्योंकि ब्रॉयलर चिकन के दाम में अनुमानित 2 प्रतिशत की कमी ने अन्य सामग्री की महंगाई के असर को संतुलित कर दिया।

