मां-बाड़ी केंद्र में फर्जी नामांकन का आरोप, ग्रामीणों ने अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का लगाया आरोप

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उदयपुर। फलासिया क्षेत्र की ग्राम पंचायत आमलीवाड़ा पंचायत समिति फलासिया के ग्राम वेलवा डाडमिया में संचालित नवीन मां-बाड़ी केंद्र को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2025 में केंद्र में बच्चे नहीं होने के बावजूद कथित तौर पर फर्जी तरीके से बच्चों का नामांकन दर्शाकर रजिस्टर में करीब 30 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई। ग्रामीणों ने मामले की जांच और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जिला कलेक्टर को शिकायत दी है।

ग्रामीणों के अनुसार, जिन बच्चों के नाम मां-बाड़ी केंद्र के रिकॉर्ड में दर्ज बताए जा रहे हैं, उनमें से कई बच्चे अन्य विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। शिकायत में ग्रामीणों ने दावा किया है कि कुछ बच्चे राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय देण्डावास, जालमपुरी, खेराड़ और आमलीवाड़ा सहित अन्य स्थानों पर अध्ययनरत हैं। ऐसे में मां-बाड़ी केंद्र के रिकॉर्ड में उनके नाम दर्ज किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि मामले की शिकायत पहले भी संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से की गई थी। शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा गांव में पहुंचकर जांच किए जाने की बात सामने आई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय उन्हें केंद्र संचालक और पर्यवेक्षक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन लंबे समय बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2026 में रिकॉर्ड में बदलाव कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने एक-एक बच्चे की जानकारी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराई है और यह भी बताया है कि संबंधित बच्चे वर्तमान में किन विद्यालयों में पढ़ रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों द्वारा मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण गांव में विवाद और आपसी तनाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में गलत तरीके से बच्चों की संख्या दर्शाई गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। ग्रामीणों ने केंद्र के संचालन, बच्चों के नामांकन और रजिस्टर में दर्ज रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि रिकॉर्ड में अनियमितता पाई जाती है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने मामले की जांच किसी स्वतंत्र विभाग या वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग रखी है, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

शिकायत की प्रतिलिपियां संभागीय आयुक्त उदयपुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो उदयपुर, जनजाति संभागीय आयुक्त उदयपुर, जनजाति उप संभागीय आयुक्त जयपुर तथा जनजाति संभागीय आयुक्त नोडल अधिकारी जयपुर सहित संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे उच्च अधिकारियों के समक्ष दोबारा शिकायत करने के साथ आगे की कार्रवाई की मांग करेंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और मां-बाड़ी केंद्र के रिकॉर्ड तथा बच्चों के वास्तविक नामांकन की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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