प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची से मां का नाम अपात्र घोषित करने पर उठे सवाल, बारिश और तूफान में मकान को पहुंचा नुकसान, पीड़ित परिवार ने प्रशासन से लगाई आवास दिलाने की गुहार
रायबरेली।जिले के ओलीपुर छोटी, सडहा क्षेत्र में एक गरीब परिवार वर्षों से पक्के मकान की सुविधा मिलने का इंतजार कर रहा है। परिवार का आरोप है कि अत्यंत जर्जर और कच्चे मकान में रहने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। परिवार के 50 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता से पीड़ित युवक करण गुप्ता ने अपनी मां राजकुमारी के नाम पर आवास उपलब्ध कराने की मांग करते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
मिली जानकारी के अनुसार, करण गुप्ता पुत्र जागेश्वर गुप्ता निवासी ओलीपुर छोटी, सडहा, जनपद रायबरेली का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। करण गुप्ता के मुताबिक, उनकी मां राजकुमारी का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास के लिए चयनित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि लगभग 60 वर्ष पुराने जर्जर मकान को देखकर भी जांच रिपोर्ट में उन्हें अपात्र कर दिया गया, जबकि उनके पास इसके अतिरिक्त न कोई दूसरी जमीन है और न ही रहने के लिए कोई अन्य मकान।
परिवार का कहना है कि मकान की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसकी दीवारें और छत कभी भी गिर सकती हैं। बारिश और तूफान के दौरान मकान को काफी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में परिवार को हर समय हादसे का डर बना रहता है। बरसात के मौसम में उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। मजबूरी में परिवार इसी जर्जर मकान में रहने को विवश है।
इस मामले में करण गुप्ता की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। उनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र के अनुसार, उन्हें बाईं ओर के हाथ और पैर में परेशानी के चलते 50 प्रतिशत स्थायी लोकोमोटर दिव्यांगता है। यह प्रमाणपत्र 12 अक्टूबर 2021 को रायबरेली की अधिकृत चिकित्सा प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया था। प्रमाणपत्र में उनकी दिव्यांगता को स्थायी बताया गया है। इसके बावजूद परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक आवास जैसी बुनियादी सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि आवास योजना के लिए सभी आवश्यक पात्रता होने के बावजूद उन्हें योजना से वंचित रखा गया है। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि आवास संबंधी जांच दोबारा कराई जाए और मौके पर पहुंचकर मकान की वास्तविक स्थिति देखी जाए। साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति, जर्जर मकान और दिव्यांग सदस्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पात्रता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए।

