हाईवे की रफ्तार के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा का भी इंतजाम, NHAI ने खर्च किए ₹19700 करोड़; 2150 से ज्यादा वाइल्डलाइफ स्ट्रक्चर तैयार

Date:

देश में तेजी से बढ़ रहे नेशनल हाईवे नेटवर्क के बीच अब वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। NHAI ने पिछले पांच वर्षों में वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए करीब ₹19,700 करोड़ खर्च किए हैं।
हाईवे का जाल बढ़ने से देश में सफर पहले के मुकाबले तेज और आसान हो रहा है, लेकिन इसके साथ जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है। सड़कें जब जंगलों से होकर गुजरती हैं, तो वाहनों की आवाजाही के कारण जानवरों के लिए हादसे और उनके प्राकृतिक रास्ते बाधित होने का खतरा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए NHAI ने नेशनल हाईवे परियोजनाओं में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए हैं। पिछले पांच वर्षों में इन उपायों पर करीब ₹19,700 करोड़ खर्च किए गए हैं, जबकि देशभर में 2,150 से ज्यादा वाइल्डलाइफ मिटिगेशन स्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं।
अंडरपास से ओवरपास तक इंतजाम
NHAI ने हाईवे निर्माण के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग तरह के स्ट्रक्चर तैयार किए हैं। इनमें वाइल्डलाइफ अंडरपास, ओवरपास, एलिवेटेड कॉरिडोर और प्रोटेक्टिव फेंसिंग शामिल हैं। इनका उद्देश्य जानवरों को सड़क पार करने के दौरान वाहनों के संपर्क में आने से बचाना और उनके प्राकृतिक आवागमन के रास्ते को बनाए रखना है।

हाईवे और जंगल के बीच संतुलन
हाईवे परियोजनाओं की प्लानिंग में अब पर्यावरण और वन्यजीवों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। अलग-अलग जगहों की परिस्थितियों के हिसाब से विशेष समाधान तैयार किए जाते हैं। इससे एक तरफ लोगों के लिए हाईवे कनेक्टिविटी बनी रहती है, वहीं दूसरी तरफ वन्यजीवों के आवास और उनके मूवमेंट कॉरिडोर को सुरक्षित रखने की कोशिश की जाती है।
कई प्रजातियों ने किया अंडरपास का इस्तेमाल
NHAI की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग परियोजनाओं में बनाए गए पशु अंडरपास का कई वन्यजीव प्रजातियों ने सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सही प्लानिंग और इंजीनियरिंग के जरिए हाईवे विकास और वन्यजीव संरक्षण को साथ लेकर चला जा सकता है।

कम होगा मानव-वन्यजीव टकराव
वन्यजीवों के लिए बनाए गए इन स्ट्रक्चर का एक बड़ा उद्देश्य ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट को कम करना है। सुरक्षित क्रॉसिंग उपलब्ध होने से जानवरों को हाईवे पर आने की जरूरत कम होती है। NHAI के अनुसार, भविष्य में भी हाईवे प्लानिंग और डिजाइन में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल उपायों को शामिल करने पर जोर रहेगा, ताकि देश का नेशनल हाईवे नेटवर्क सुरक्षित, हरित और मजबूत बनाया जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related