ग्वालियर। लोगों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा देने वाली बीमा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। ग्वालियर के एक युवक ने आरोप लगाया है कि उसने अपनी होंडा एक्टिवा का विधिवत बीमा कराया था, लेकिन वाहन क्षतिग्रस्त होने के बाद भी उसे बीमा क्लेम का भुगतान नहीं मिला। इतना ही नहीं, युवक का आरोप है कि सर्वे करने पहुंचे कंपनी के प्रतिनिधि ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और दावा खारिज कराने की कोशिश की। अब पीड़ित न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है।
मामला ग्वालियर के जडेरुआ कलां पिंटो पार्क क्षेत्र का है, जहां रहने वाले भूपेंद्र राजावत ने अपनी होंडा एक्टिवा का बीमा रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से कराया था। उनका कहना है कि उन्होंने समय पर बीमा प्रीमियम जमा किया और सभी औपचारिकताएं पूरी की थीं। उन्हें भरोसा था कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनी उनके नुकसान की भरपाई करेगी, लेकिन जब वाहन क्षतिग्रस्त हुआ तो उनकी उम्मीदें टूट गईं।
भूपेंद्र राजावत का आरोप है कि शोरूम में कार्यरत संदीप नामक सुपरवाइजर ने ही उनकी गाड़ी का सर्वे किया था और उसी ने बीमा कराने की सलाह दी थी। लेकिन दुर्घटना के बाद जब उन्होंने क्लेम की प्रक्रिया शुरू कराई तो वही सर्वेयर दावा भुगतान कराने के बजाय उसे खारिज कराने की बात करने लगा।
पीड़ित का आरोप है कि सर्वेयर ने उनसे कहा कि गाड़ी से ऐसा नुकसान नहीं होता, अगर तुम मर जाते तो पैसा दिला देता। भूपेंद्र का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी न केवल असंवेदनशील थी बल्कि एक बीमा कंपनी के प्रतिनिधि के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। उनका आरोप है कि वास्तविक नुकसान का सही आकलन किए बिना गलत सर्वे रिपोर्ट तैयार कर दी गई, जिसके कारण उनका क्लेम रोक दिया गया।
भूपेंद्र का कहना है कि उन्होंने कई बार कंपनी के अधिकारियों और संबंधित लोगों से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया। उनका आरोप है कि बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी शिकायत का समाधान नहीं किया गया। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि किसी ग्राहक ने नियमों के तहत बीमा कराया है तो उसके दावे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी कारण से क्लेम अस्वीकार किया जाता है तो बीमा कंपनी को उसका स्पष्ट और लिखित कारण देना चाहिए, ताकि ग्राहक अपने अधिकारों का उपयोग कर सके।
बीमा विशेषज्ञों के अनुसार मोटर बीमा के तहत क्लेम का भुगतान पॉलिसी की शर्तों और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। दुर्घटना की सूचना समय पर देना, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना और वाहन का निरीक्षण कराना जरूरी होता है। यदि बीमाधारक को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है तो वह पहले कंपनी के शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज करा सकता है। वहां से राहत नहीं मिलने पर बीमा लोकपाल, उपभोक्ता आयोग अथवा संबंधित नियामक संस्थाओं का दरवाजा खटखटा सकता है।
फिलहाल भूपेंद्र राजावत का कहना है कि उन्हें अब भी न्याय और अपने वैध बीमा दावे का इंतजार है। यदि उनकी शिकायत का निष्पक्ष समाधान नहीं हुआ तो वे कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ संबंधित उच्च अधिकारियों से भी हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

