कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि हमारी लड़ाई किसी दल, संस्था या व्यक्तियों के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के मतदाताओं के अधिकारों, संविधानऔर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने को लेकर है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘सत्तापक्ष को फायदा पहुंचाने’ का आरोप लगाया। खरगे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए। खरगे ने कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी की लड़ाई किसी दल, संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकार, संविधान और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कार्य समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे। खरगे ने चुनाव आयोग में पारदर्शिता, मतदाता सूची में सुधार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाई।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के भाषण की 10 बड़ी बातें
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि पिछले 12 सालों में लोकतंत्र की नींव को कमजोर किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी एक बार फिर कांग्रेस के कंधों पर है।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने आरोप लगाया कि साजिश के तहत मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित होना चाहिए और उसकी निष्पक्ष गिनती होनी चाहिए।
खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सरकार के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सुरक्षा की पहली शर्तों में से एक है।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने राहुल गांधी को बधाई देते हुए महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितताओं के उनके आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने डुप्लीकेट मतदाताओं और एक पते पर बड़ी संख्या में नाम दर्ज होने पर सवाल उठाए।
खरगे ने आरोप लगाया कि युवाओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव किया गया। उन्होंने इसे गैरकानूनी बताते हुए युवाओं के वोटिंग अधिकारों की रक्षा की बात कही।
कांग्रेस ने मतदाता सूची में बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक करने, नाम हटाए जाने पर सूचना और अपील का अवसर देने, राजनीतिक दलों को समय पर डेटा उपलब्ध कराने, गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र जांच और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
सीडब्ल्यूसी की बैठक में खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने को कहा। ये मांगें खरगे के राजनीतिक बयान का हिस्सा थीं।
खरगे ने नोटबंदी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि अब वोटबंदी की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीबों, दलितों और वंचितों के लिए वोट सबसे बड़ा अधिकार है।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शनों की भी सराहना की।
खरगे ने कहा कि आगामी पांच राज्यों के चुनाव में किसी भी मतदाता का अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव, स्वतंत्र संस्थाओं और हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित रखने का संकल्प लेने की अपील की।
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