भारत ने किया ‘प्रलय’ क्वाजी बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण, इसकी खूबी दुश्मन को करेगी परेशान; देखें वीडियो

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 5 नवंबर को सुबह लगभग 11:10 बजे ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘प्रलय’ नामक क्वाज़ी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया।
नई दिल्लीः भारत ने गुरुवार को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘प्रलय’ नामक क्वाज़ी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार को सुबह लगभग 11:10 बजे इस बैलिस्टिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया गया।
सफल रहा मिसाइल का परीक्षण

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज द्वारा तैनात विभिन्न उपकरणों से मिले डेटा से पुष्टि हुई है कि परीक्षण के सभी लक्ष्य पूरे कर लिए गए हैं। इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित ‘रिसर्च सेंटर इमारत’ (RCI) और DRDO ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। इसके विकास और उत्पादन में साझेदार रही ‘भारत डायनामिक्स लिमिटेड’ ने इस सिस्टम का निर्माण किया है। यह उड़ान परीक्षण ‘यूज़र इवैल्यूएशन ट्रायल’ (उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण) के हिस्से के रूप में किया गया, जिसमें DRDO के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और रक्षा बलों के सदस्य मौजूद थे।

सेना में शामिल किए जाने का रास्ता साफ

इस सफल परीक्षण के बाद अब इस सिस्टम को सेना में शामिल किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए DRDO और सुरक्षा बलों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों से लैस यह मिसाइल, उभरते खतरों के खिलाफ सेना की तकनीकी क्षमताओं और परिचालन तैयारियों को और मजबूत करेगी। रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी इस सफल परीक्षण से जुड़ी टीमों को बधाई दी। इससे पहले भारत ने अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी जानकारी दी थी।
प्रलय मिसाइल के बारे में जानें

प्रलय मिसाइल स्वदेशी रूप से विकसित, सॉलिड-प्रोपेलेंट वाली, क्वाज़ी-बैलिस्टिक सतह-से-सतह मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 150 से 500 किमी के बीच बताई जा रही है। यह 1,000 किलोग्राम का पेलोड 350 किमी तक ले जा सकती है, जबकि 500 ​​किलोग्राम का हल्का पेलोड होने पर इसकी मारक क्षमता बढ़कर लगभग 500 किमी हो जाती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसमें सटीक निशाना लगाने के लिए उन्नत गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। यह अलग-अलग लक्ष्यों को भेदने के लिए कई तरह के वॉरहेड ले जा सकती है। इस मिसाइल को मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है, जिससे इसे अलग-अलग जगहों से तैनात करना आसान हो जाता है।
प्रलय एक ‘क्वाज़ी-बैलिस्टिक’ रास्ते (trajectory) पर चलती है, जिसका मतलब है कि उड़ान के दौरान यह अपना रास्ता बदल सकती है, जबकि सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक तय रास्ते पर ही चलती हैं। इस खूबी की वजह से दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे बीच में ही रोक पाना (intercept करना) बहुत मुश्किल हो जाता है। इसका सॉलिड-फ्यूल प्रोपल्शन और मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म इसे इस्तेमाल करने में काफी लचीलापन (operational flexibility) प्रदान करते हैं।

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