वाराणसी में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: डीसीएम से 2,570 मोबाइल और 113 सिम कार्ड बरामद, पश्चिम बंगाल के 5 आरोपी गिरफ्तार; साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कपसेठी थाना पुलिस ने मोबाइल फोन की बड़ी खेप बरामद कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 17 अक्टूबर 2026 की रात करीब 11:45 बजे बरकी पेट्रोल पंप के पास बंद पड़े ढाबे पर खड़े एक डीसीएम वाहन की तलाशी के दौरान 2,570 मोबाइल फोन और अलग-अलग कंपनियों के 113 सिम कार्ड बरामद किए गए। बरामद मोबाइलों में 345 एंड्रॉयड फोन और 2,225 कीपैड फोन शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से 2,149 रुपये नकद भी बरामद किए हैं। मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के निर्देश पर चोरी की घटनाओं की रोकथाम और संदिग्ध व्यक्तियों व वाहनों की जांच के लिए अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान कपसेठी चौराहे पर मौजूद पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि भदोही की ओर से कछवा रोड की तरफ गया एक डीसीएम वाहन बरकी पेट्रोल पंप के पास बंद पड़े ढाबे पर खड़ा है। वाहन पर पश्चिम बंगाल का नंबर प्लेट लगा हुआ है और उसमें संदिग्ध सामान लदा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम मौके पर पहुंची और डीसीएम की तलाशी ली। वाहन में पांच लोग सवार मिले। जांच के दौरान बोरियों में भरकर रखे गए हजारों मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुए।

पुलिस के मुताबिक, मोबाइल फोन अलग-अलग रंगों और ब्रांड के बोरों में भरकर रखे गए थे। एक पीले रंग की बोरी से 125 एंड्रॉयड फोन मिले, जबकि गुलाबी और सफेद बोरी में 320 एंड्रॉयड फोन रखे थे। इसके अलावा अलग-अलग बोरियों से 2,225 कीपैड मोबाइल बरामद किए गए। एक पारदर्शी पन्नी में 113 सिम कार्ड भी मिले। इस तरह कुल बरामदगी में 345 एंड्रॉयड मोबाइल, 2,225 कीपैड मोबाइल और 113 सिम कार्ड शामिल हैं। पुलिस ने बरामदगी के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 0149/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2) और 317(5) में मामला दर्ज किया है।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वे फेरी लगाने का काम करते हैं और अलग-अलग गांवों तथा शहरों में घूमकर कबाड़ के नाम पर मोबाइल फोन खरीदते हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने यह भी बताया कि इनमें से कुछ मोबाइल कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों से चोरी किए जाते थे और उन्हें खराब कर दिया जाता था, ताकि उनकी पहचान या लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो। इसके बाद इन मोबाइलों को दूसरे राज्यों में ले जाकर बेचने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में मोबाइल बेचने की जानकारी दी है।

पूछताछ में जामताड़ा जैसे स्थानों पर मोबाइल और सिम कार्ड बेचने से अच्छी रकम मिलने की बात भी कथित रूप से बताई गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने मोबाइल फोन की मरम्मत के बाद उन्हें इंटरनेट के माध्यम से साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जाने की बात भी कही है। हालांकि, इन मोबाइलों का इस्तेमाल किन घटनाओं में हुआ, कितने मोबाइल चोरी के हैं और क्या किसी संगठित साइबर अपराध गिरोह से इनका सीधा संबंध है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस की ओर से बरामद मोबाइलों और सिम कार्डों की जांच कर उनके स्रोत तथा संभावित आपराधिक इस्तेमाल का पता लगाने की आवश्यकता है।

पुलिस ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा थाना क्षेत्र के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बाबुर अली, मंटू खां, नारजूल शेख, लालबाबू शेख और मिलन शेख के रूप में बताई गई है। पुलिस प्रेस नोट में दिए गए विवरण के अनुसार, सभी आरोपी मुर्शिदाबाद जिले के अलग-अलग गांवों और मोहल्लों के निवासी हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कुछ आरोपियों की उम्र संबंधी विवरण स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने बताया कि बरामदगी और गिरफ्तारी के दौरान सर्वोच्च न्यायालय तथा मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया। गिरफ्तारी की सूचना भी मौके पर दी गई और आरोपियों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद न्यायालय में पेश करने के लिए भेजा गया।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि हजारों मोबाइल फोन और 113 सिम कार्ड आरोपियों तक कैसे पहुंचे और क्या इनका इस्तेमाल पहले किसी आपराधिक गतिविधि में किया गया था। यदि जांच में चोरी के मोबाइलों को दूसरे राज्यों में खपाने या साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जाने के साक्ष्य मिलते हैं, तो इस बरामदगी से जुड़े नेटवर्क के अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद मोबाइलों की बरामदगी को लेकर जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और कथित खुलासों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा पुलिस जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

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