आरा। भोजपुर जिले के आरा नगर क्षेत्र में महिला समूह ऋण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सैकड़ों महिलाओं ने आरोप लगाया है कि ऋण वितरण के समय बैंक कर्मियों ने उन्हें 15 से 18 माह तक किस्त जमा करने की जानकारी दी थी, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अब उनसे अतिरिक्त महीनों की किस्त जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि बैंक की इस कथित मनमानी से वे आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं।
मामले को लेकर विचणूनगर निवासी पूनम देवी सहित कई महिलाओं ने आरोप लगाया है कि जनाबैंक के माध्यम से करीब 200 महिलाओं को ऋण दिया गया था। ऋण स्वीकृति के दौरान बैंक कर्मियों द्वारा बताया गया था कि कुछ महिलाओं को 15 माह और कुछ को 18 माह तक किस्त जमा करनी होगी। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने समय पर सभी किस्तों का भुगतान भी कर दिया, लेकिन अब उनसे अतिरिक्त किस्तों की मांग की जा रही है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने बैंक पहुंचकर इस संबंध में जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। महिलाओं का कहना है कि पहले 15 माह की अवधि बताई गई, फिर 24 माह तक किस्त जमा करने की बात कही जाने लगी। इसके बाद भी कथित रूप से उन्हें बताया गया कि यदि आगे भी किस्त जमा नहीं की गई तो भविष्य में दोबारा ऋण सुविधा नहीं मिलेगी।
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। उल्टा उन्हें डांट-फटकार कर वापस भेज दिया गया। महिलाओं का कहना है कि वे लगातार बैंक और संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।
मामले को लेकर महिलाओं ने नगर थाना आरा में भी आवेदन दिया, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने यह कहते हुए कार्रवाई करने से इनकार कर दिया कि ऋण लेते समय उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। महिलाओं का कहना है कि उन्हें ऋण की शर्तों की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी और अब बदलती शर्तों के नाम पर अतिरिक्त वसूली की जा रही है।
पीड़ित पक्ष का दावा है कि बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित कार्यप्रणाली से करीब 200 परिवार प्रभावित हुए हैं। महिलाओं का कहना है कि वे पहले ही आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रही हैं, ऐसे में अतिरिक्त किस्तों की मांग उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
महिलाओं ने जिला प्रशासन, बैंकिंग अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि ऋण वितरण के समय बताई गई शर्तों और वर्तमान में मांगी जा रही किस्तों की जांच की जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और बैंक के आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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