आरा। भोजपुर जिले के भारा प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत करेलौ निरनपुर के वार्ड नंबर 11 में नाली निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक जिस स्थान पर नाली का निर्माण कराया जा रहा है, उसके नीचे पहले से ही नल-जल योजना की पाइपलाइन बिछी हुई है। आरोप है कि पाइपलाइन के ऊपर से ही नाली का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में पाइपलाइन की मरम्मत और रखरखाव को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के दूसरी तरफ करीब 18 फीट सरकारी जमीन खाली पड़ी हुई है। उनका सवाल है कि जब सड़क के दूसरी ओर पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध है तो नाली निर्माण के लिए ऐसी जगह का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है, जहां पहले से नल-जल योजना की पाइपलाइन बिछी हुई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क के दक्षिणी हिस्से में करीब 5 इंच की गहराई पर नल-जल योजना की पाइपलाइन बिछी हुई है। इसी पाइपलाइन के ऊपर से नाली का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान पाइपलाइन पर दबाव पड़ने या भविष्य में पाइप में किसी प्रकार की खराबी आने पर उसकी मरम्मत करना मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता भविष्य की परेशानी को लेकर है। उनका कहना है कि यदि नल-जल पाइपलाइन में कभी लीकेज या तकनीकी खराबी आती है तो उसे ठीक करने के लिए नाली को तोड़कर पाइपलाइन तक पहुंचना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में एक सरकारी योजना के तहत बनी नाली को दोबारा क्षतिग्रस्त करना पड़ेगा और मरम्मत के लिए अतिरिक्त खर्च भी हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाली निर्माण का उद्देश्य गांव के गंदे और बरसाती पानी की निकासी को बेहतर करना है, लेकिन निर्माण की जगह का चयन तकनीकी रूप से सही होना जरूरी है। ग्रामीण चाहते हैं कि नाली और नल-जल पाइपलाइन की स्थिति का मौके पर निरीक्षण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी सरकारी योजना को नुकसान न पहुंचे।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि मौके पर पहुंचकर नाली निर्माण की स्थिति, पाइपलाइन की गहराई, सरकारी भूमि की उपलब्धता और निर्माण की तकनीकी उपयुक्तता की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि सड़क के दूसरी ओर उपलब्ध सरकारी जमीन नाली निर्माण के लिए उपयुक्त है तो अधिकारियों को सभी पहलुओं की जांच के बाद उचित निर्णय लेना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना गांव के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। इसलिए पाइपलाइन की सुरक्षा को नजरअंदाज कर कोई ऐसा निर्माण नहीं होना चाहिए, जिससे भविष्य में जलापूर्ति बाधित होने की स्थिति पैदा हो।
फिलहाल नाली निर्माण को लेकर ग्रामीणों की ओर से आपत्ति और सवाल उठाए गए हैं। निर्माण की तकनीकी स्थिति, जमीन की प्रकृति और नल-जल पाइपलाइन पर संभावित प्रभाव की वास्तविक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द मौके का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

