सीतापुर। थाना खैराबाद क्षेत्र के ग्राम गौरिया खुर्द में पिछले करीब 25 से 30 वर्षों से कथित रूप से कच्ची शराब बनाने और बेचने का कारोबार चलने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार के कारण आए दिन लड़ाई-झगड़े और विवाद की स्थिति बनी रहती है। ग्रामीणों ने मामले को लेकर मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों की ओर से दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि गांव में लंबे समय से कच्ची शराब का कारोबार किया जा रहा है। उनका कहना है कि शराब के कारण गांव का माहौल लगातार खराब हो रहा है और आए दिन विवाद की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने और अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है।
शिकायत में कथित रूप से कच्ची शराब बनाने या बेचने वालों के रूप में कुछ नाम भी बताए गए हैं। इनमें सतोहन उर्फ जयजय राम, धीरज, दीपू उर्फ छोटे, राजाराम और छोटे उर्फ भवली के नाम शामिल हैं। हालांकि, इन व्यक्तियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित लोगों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि कच्ची शराब के कारण कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शराब के नशे में होने वाले विवादों से गांव में तनाव का माहौल बनने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस कथित अवैध कारोबार पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने मीडिया और प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही गांव में अवैध शराब की बिक्री और निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि गांव में लंबे समय से चल रहे इस कथित कारोबार के कारण आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
मामला थाना खैराबाद, जिला सीतापुर से संबंधित बताया गया है। अब देखना होगा कि शिकायत के आधार पर स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं।

