5 दिन से लगातार सस्ता हो रहा सोना, अब तक इतना गिर गया भाव; चांदी के रेट भी आए नीचे

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सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट ने सर्राफा बाजार का रुख बदल दिया है। दिल्ली में सोना पांचवें कारोबारी सत्र में भी सस्ता हुआ। पिछले पांच दिनों में इसकी कीमत करीब ₹3,600 प्रति 10 ग्राम घट चुकी है।
बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में सस्ता हुआ है। पिछले पांच दिनों में सोने की कीमत करीब ₹3,600 प्रति 10 ग्राम तक घट चुकी है। 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना ₹1,600 टूटकर ₹1,52,400 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, दो दिन स्थिर रहने के बाद चांदी के भाव में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

दिल्ली के सर्राफा बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना ₹1,600 गिरकर ₹1,52,400 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले इसका भाव ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम था। पांच कारोबारी सत्र पहले सोने की कीमत करीब ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम थी। यानी पांच दिनों में सोना लगभग ₹3,600 सस्ता हो चुका है।सोने की कीमतों में यह लगातार पांचवें सत्र की गिरावट है। कारोबारियों के मुताबिक, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण सोने पर दबाव बना हुआ है।

चांदी भी ₹5000 टूटी
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है। दो कारोबारी सत्र तक भाव स्थिर रहने के बाद चांदी ₹5,000 टूटकर ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई। इससे पिछले सत्र में चांदी ₹2.42 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। कारोबारियों का कहना है कि चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल डिमांड से जुड़े होने के कारण वैश्विक आर्थिक संकेतों का भी इस पर असर पड़ता है।

डॉलर मजबूत होने से सोने पर दबाव
कमजोर वैश्विक संकेतों और धीमी घरेलू मांग के बीच सोने की कीमतों में गिरावट आई। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया। वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 1 फीसदी गिरकर 4,253.61 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी 1.4 फीसदी फिसलकर 63.56 डॉलर प्रति औंस रही।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी सोने के लिए चुनौती बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में सप्लाई को लेकर चिंता के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। महंगा तेल दुनियाभर में महंगाई बढ़ा सकता है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम हो सकती है।

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