बिहार के बेगूसराय जिले से प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। वीरपुर प्रखंड के गारा ग्राम पंचायत निवासी रामबाबू पासवान ने आरोप लगाया है कि उनका परिवार पिछले लगभग 50 वर्षों से जिस स्थान पर रह रहा था, वहां बिना किसी पूर्व सूचना के बुलडोजर चलाकर उनका घर और जीविकोपार्जन का एकमात्र साधन बनी दुकान ध्वस्त कर दी गई। पीड़ित का कहना है कि इस कार्रवाई से उनका पूरा परिवार बेघर हो गया है और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
रामबाबू पासवान ने बताया कि वे दिव्यांग हैं। उनके पास मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, बेगूसराय द्वारा जारी लगभग 60 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाणपत्र भी है। शारीरिक स्थिति के कारण वे कोई भारी काम करने में सक्षम नहीं हैं और वर्षों से अपनी छोटी दुकान के सहारे ही परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।
पीड़ित के अनुसार उनकी जमीन को लेकर सुरेंद्र कुमार कुशवाहा से लंबे समय से विवाद चल रहा है। उनका आरोप है कि सुरेंद्र कुमार कुशवाहा उनकी जमीन और दुकान पर कब्जा करना चाहता था तथा इस संबंध में उन्हें कई बार जान से मारने की धमकी भी दी गई। रामबाबू का कहना है कि इसी विवाद के बीच 11 जुलाई को प्रशासनिक टीम जेसीबी और बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची और उनका घर तथा दुकान गिरा दी।
रामबाबू पासवान का आरोप है कि कार्रवाई से पहले उन्हें किसी प्रकार का नोटिस नहीं दिया गया और न ही मकान या दुकान खाली करने के लिए समय दिया गया। उनका कहना है कि प्रशासनिक अमला सीधे बुलडोजर लेकर पहुंचा और कुछ ही समय में उनका वर्षों पुराना आशियाना मलबे में बदल गया।
पीड़ित के अनुसार घर और दुकान में रखा सामान, घरेलू बर्तन, फर्नीचर, खाद्य सामग्री तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं भी मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं। उनका कहना है कि यदि उन्हें पहले से सूचना दी जाती तो वे अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जा सकते थे और आर्थिक नुकसान से बच सकते थे।
रामबाबू ने बताया कि उनके परिवार में लगभग 15 से 16 सदस्य रहते हैं। सभी लोग इसी मकान में निवास करते थे और दुकान से होने वाली आय पर ही परिवार का गुजारा चलता था। दुकान टूट जाने के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि अब परिवार के पास न रहने के लिए घर बचा है और न ही कमाई का कोई साधन।
पीड़ित ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से उनके नुकसान का उचित आकलन कर मुआवजा देने, परिवार के लिए रहने की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा उनकी आजीविका को फिर से स्थापित करने की मांग की है। साथ ही जमीन विवाद और कथित धमकियों की भी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की गुहार लगाई है।

