राजस्व कोर्ट ने बेदखली का आवेदन खारिज किया, परिवार का आरोप- इसके बावजूद पुलिस की मौजूदगी में पुश्तैनी मकान और बाउंड्री ध्वस्त कर दी

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सिंगरौली में जमीन विवाद ने लिया गंभीर मोड़, मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट करने और धमकाने के भी आरोप; एसपी से कार्रवाई और सुरक्षा की गुहार

सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील क्षेत्र में जमीन विवाद का मामला अब गंभीर आरोपों के साथ पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया है। ग्राम बरवाडीह निवासी धर्मराज पाल और उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि राजस्व न्यायालय द्वारा बेदखली का आवेदन खारिज किए जाने के बावजूद उनके पुश्तैनी मकान और बाउंड्री को पुलिस की मौजूदगी में ध्वस्त कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि इस कार्रवाई में उन्हें करीब 50 हजार रुपए का नुकसान हुआ है।

पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक सिंगरौली को शिकायत देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, परिवार को सुरक्षा और नुकसान की भरपाई की मांग की है। शिकायत में पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

राजस्व न्यायालय ने बेदखली का आवेदन किया था खारिज

शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्राम बरवाडीह स्थित भूमि को लेकर विवाद चल रहा है। इस मामले में नायब तहसीलदार वृत्त कोरावल, तहसील चितरंगी के न्यायालय में राजस्व प्रकरण क्रमांक 0013/अ-70/2024-25 की सुनवाई हुई थी। आदेश दिनांक 16 मार्च 2026 में न्यायालय ने बेदखली के आवेदन को खारिज कर दिया।

आदेश में उल्लेख किया गया कि संबंधित भूमि को लेकर उच्च न्यायालयीन राजस्व प्रक्रिया में प्लॉट सुधार का प्रकरण विचाराधीन है। साथ ही संबंधित भूमि के सीमांकन और स्वामित्व से जुड़े विवाद के कारण वरिष्ठ न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण के निराकरण तक अनावेदकगण को भूमि से बेदखल किया जाना न्यायसंगत नहीं है। इसी आधार पर बेदखली का प्रकरण खारिज कर दिया गया।

परिवार का आरोप है कि राजस्व न्यायालय के आदेश के बावजूद 3 जून 2026 को कथित रूप से पुलिस की मौजूदगी में उनके मकान और बाउंड्री को ध्वस्त कर दिया गया।

पुलिस की मौजूदगी में मकान तोड़ने का आरोप

शिकायत में धर्मराज पाल ने आरोप लगाया है कि 3 जून को करीब शाम 4 बजे कई लोग और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। आरोप है कि नौडिहवा चौकी प्रभारी मनोज सिंह सहित पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उनके पुश्तैनी मकान और बाउंड्री को ध्वस्त कर दिया गया।

परिवार का आरोप है कि इस कार्रवाई में राजेश पाल, जितेंद्र पाल, सेनापति पाल, नरेश पाल, बबल पाल, अंजली पाल, बुद्धवंती पाल, पचुई पाल, पार्वती पाल, सावित्री पाल और सम्भावती पाल सहित अन्य लोग शामिल थे।

शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस भूमि पर उनका मकान बना था, वहां वह लंबे समय से काबिज थे। परिवार का आरोप है कि राजस्व न्यायालय में बेदखली का आवेदन खारिज होने के बाद भी कथित रूप से दबाव और पुलिस बल के सहारे मकान को नुकसान पहुंचाया गया।

पत्नी वीडियो बनाने लगी तो मोबाइल छीनने का आरोप

पीड़ित परिवार ने पुलिस पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, जब धर्मराज पाल की पत्नी पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाने लगीं तो कथित रूप से पुलिसकर्मियों ने उनका हाथ मरोड़कर मोबाइल फोन छीन लिया।

परिवार का आरोप है कि मोबाइल वीवो कंपनी का था। शिकायत में कहा गया है कि मोबाइल में रिकॉर्ड किया गया वीडियो कथित रूप से डिलीट कर दिया गया और फोन को भी नुकसान पहुंचाया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत करने की बात कही तो उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई कि शिकायत कहीं भी कर लो, जांच तो पुलिस को ही करनी है और कोई कार्रवाई नहीं होगी।

परिवार का आरोप है कि इस कथित घटना के बाद वे भय के माहौल में रह रहे हैं।

जान से मारने की धमकी और रास्ते में मारपीट के आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जमीन विवाद के चलते विरोधी पक्ष के लोगों द्वारा उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकाया जा रहा है। आरोप है कि रास्ते में पत्थर से मारपीट की जा रही है और परिवार की बहू-बेटियों के साथ अश्लील गाली-गलौज कर अभद्र व्यवहार करने का प्रयास किया जा रहा है।

परिवार का कहना है कि लगातार धमकियों के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। उन्हें आशंका है कि यदि समय रहते पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो उनके साथ कोई गंभीर घटना हो सकती है।

एसडीओपी को शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत 17 जून 2026 को अनुविभागीय पुलिस अधिकारी चितरंगी के समक्ष की थी। शिकायत में मकान तोड़ने, मोबाइल छीनने, वीडियो डिलीट करने, धमकी देने और मारपीट सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे।

परिवार का आरोप है कि शिकायत के बाद भी 22 जून 2026 तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि कार्रवाई नहीं होने के कारण आरोपियों के हौसले बढ़ रहे हैं और परिवार पर खतरा लगातार बना हुआ है।

पुलिस पर पक्षपात और रिश्वत के आरोप भी लगाए

शिकायत में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि कथित रूप से विरोधी पक्ष के प्रभाव में पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने राजस्व न्यायालय के आदेश की अनदेखी करते हुए मकान और बाउंड्री को ध्वस्त कराने में सहयोग किया।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मकान किस परिस्थिति में ध्वस्त किया गया और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या थी।

एसपी से उच्चस्तरीय जांच और सुरक्षा की मांग

पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक सिंगरौली से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। शिकायत में मकान और बाउंड्री को हुए नुकसान की जांच, मोबाइल फोन छीनने और वीडियो डिलीट करने के आरोपों की जांच, धमकी और मारपीट के आरोपों पर कार्रवाई तथा पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।

परिवार ने यह भी मांग की है कि उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

राजस्व आदेश के बाद भी कार्रवाई पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजस्व न्यायालय ने बेदखली का आवेदन खारिज कर दिया था और भूमि से जुड़े अन्य विवाद वरिष्ठ न्यायालय में विचाराधीन थे, तो इसके बाद कथित रूप से मकान और बाउंड्री को किस आदेश के आधार पर ध्वस्त किया गया।

अब पीड़ित परिवार पुलिस और प्रशासन से इसी सवाल का जवाब मांग रहा है। परिवार का कहना है कि यदि उनके खिलाफ कोई वैध आदेश था तो उसकी प्रति उन्हें दी जानी चाहिए थी और यदि कार्रवाई नियमों के विरुद्ध हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय, सुरक्षा और अपने नुकसान की भरपाई चाहिए। अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दी गई शिकायत पर जांच कब शुरू होती है और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

यह खबर शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत राजस्व आदेश की जानकारी पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित पुलिस अधिकारियों और दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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