उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के थाना सिकरीगंज क्षेत्र के निवासी सुनील ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फरवरी माह में उन्होंने अपने 70 वर्षीय दादा रामदास का मोतियाबिंद का ऑपरेशन एम्स दिल्ली में कराया था। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही हुई, जिसके कारण उनके दादा की आंख पूरी तरह खराब हो गई। अब उन्हें आंखों से स्पष्ट दिखाई नहीं देता और उनकी दृष्टि गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है।
सुनील का कहना है कि उनके दादा रामदास और उन्हीं के पड़ोसी जिनका नाम दीनानाथ है उम्र 65 साल है उनके साथ भी यही घटना घटी आयुष्मान भारत योजना के पात्र लाभार्थी हैं और उनका आयुष्मान कार्ड भी बना हुआ था। परिवार का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड के आधार पर इलाज के दौरान उनके साथ गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी की गई। उनका दावा है कि ऑपरेशन गलत तरीके से किया गया, जिससे उनकी आंख को अपूरणीय क्षति पहुंची। परिवार का यह भी आरोप है कि इलाज के बाद उनकी आंख की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और अब दोनों आंखों से भी उन्हें ठीक से दिखाई नहीं देता।
पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि लगातार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
सुनील ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में इलाज में लापरवाही हुई है तो दोषी चिकित्सकों और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज के साथ ऐसी घटना न हो।
परिवार ने यह भी मांग की है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के मामलों की विशेष निगरानी की जाए। उनका आरोप है कि आयुष्मान कार्ड धारकों के साथ भेदभाव और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रहती हैं, इसलिए इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

