बिहार के नालंदा जिले के छबीलापुर थाना क्षेत्र से जमीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने अपनी पैतृक जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश, पुलिस प्रशासन पर सहयोग न मिलने और लगातार मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि पिछले करीब दो वर्षों से न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता छोटे प्रसाद ने बताया कि उनके परिवार के पास लगभग 50 डिसमिल जमीन के वैध दस्तावेज मौजूद हैं। उनका आरोप है कि गांव के ही राजेंद्र प्रसाद और ब्रजभूषण प्रसाद उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। जब भी वे अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए सीमांकन या पिलर लगाने की कोशिश करते हैं, उन्हें तोड़ दिया जाता है और विरोध करने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
पीड़ित का कहना है कि इस मामले की शिकायत उन्होंने स्थानीय थाना, वरीय पुलिस अधिकारियों तथा संबंधित अधिकारियों से भी की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनका आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों से यह अनुरोध भी किया कि यदि जमीन वास्तव में दूसरी पार्टी की है तो उन्हें लिखित रूप में इसकी जानकारी दी जाए, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने ऐसा कोई लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया। इससे परिवार में असमंजस और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
छोटे प्रसाद का कहना है कि विरोधी पक्ष यह दावा करता है कि उनके दादा ने यह जमीन बेच दी थी, जबकि उनका कहना है कि उस समय उनके पिता जीवित थे। ऐसे में उनका सवाल है कि पिता के रहते दादा द्वारा जमीन बेचने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक अभिलेखों की जांच कराने और सत्य सामने लाने की मांग की है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि लंबे समय से चल रहे इस विवाद के कारण उन्हें आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की तो भविष्य में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि जमीन के अभिलेखों की जांच कराकर अवैध कब्जे की कोशिश को रोका जाए और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हालांकि, इस मामले में दूसरे पक्ष का बयान सामने नहीं आया है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

