भरूच (गुजरात) | अखिलेश्वर से विशेष रिपोर्ट
गुजरात के भरूच जिले के अखिलेश्वर क्षेत्र अंतर्गत कुकरवाड़ा गांव में चल रहे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से मजदूरों के शोषण का गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। झारखंड के गढ़वा जिले के निवासी संतोष कुमार, उनकी पत्नी सरोज और तीन छोटे बच्चों के साथ पिछले छह वर्षों से यहां काम कर रहे हैं। संतोष कुमार के अनुसार, वह और उनके साथ करीब 180 मजदूर बुलेट ट्रेन निर्माण कार्य में लगे हुए हैं, जहां उनसे अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जा रहा है।
मजदूरों का आरोप है कि उनसे प्रतिदिन करीब 11 घंटे तक पानी के अंदर काम कराया जाता है, लेकिन इसके बदले उन्हें मात्र ₹600 की मजदूरी दी जाती है। जबकि सरकार द्वारा उसी काम के लिए ठेकेदार अखिलेश प्रजापति को ₹1100 प्रति मजदूर भुगतान किया जाता है। मजदूरों का कहना है कि बीच का पैसा ठेकेदार हड़प लेता है और इसी लालच में मजदूरों पर अत्याचार किया जाता है।
पीड़ित संतोष कुमार ने बताया कि ठेकेदार अखिलेश प्रजापति है, जो अपने बेटे नंदन, हरि ओम और अंश के नाम पर ठेकेदारी का काम चलाता है। आरोप है कि ठेकेदार न सिर्फ मजदूरी में कटौती कर रहा है, बल्कि अब मजदूरों को जबरन उनके रहने के कमरे खाली करने का दबाव भी बना रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि मजदूरों को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई और अचानक कहा गया कि तुरंत कमरा खाली करो।
संतोष कुमार का कहना है कि वह अपनी पत्नी और छोटे बच्चों के साथ उसी कमरे में रह रहे हैं। अचानक घर खाली करने को कहे जाने से परिवार सड़क पर आ जाने की कगार पर है। मजदूरों का कहना है कि वे बाहरी राज्य से हैं, यहां कोई जान-पहचान नहीं है और अचानक कमरा खाली कर देना उनके लिए असंभव है। उनका सिर्फ इतना कहना है कि यदि कमरा खाली कराना है तो कम से कम 8 से 10 दिन का समय दिया जाए, ताकि वे दूसरा ठिकाना ढूंढ सकें।
पीड़ितों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे थाने भी गए थे, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। संतोष कुमार के अनुसार, थाने में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि “कमरा ठेकेदार का है, वह खाली करा सकता है।” मजदूरों का कहना है कि पुलिस ने उनकी मजबूरी और हालात को समझने की कोशिश तक नहीं की।
इस पूरे मामले ने श्रम कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर देश में बुलेट ट्रेन जैसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं परियोजनाओं को खड़ा करने वाले मजदूर न्यूनतम मजदूरी, सम्मान और सुरक्षित आवास तक से वंचित हैं। करीब 180 मजदूरों का भविष्य और उनके परिवारों की सुरक्षा आज सवालों के घेरे में है।
मजदूरों ने प्रशासन और श्रम विभाग से मांग की है कि ठेकेदार के खिलाफ जांच कराई जाए, बकाया और सही मजदूरी दिलाई जाए तथा जबरन कमरे खाली कराने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
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