दुर्ग में अतिक्रमण नोटिस पर बवाल, बिना जांच कार्रवाई का आरोप; अधिवक्ता ने पंचायत को दी कानूनी चेतावनी

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम चंगोरी में अतिक्रमण को लेकर जारी नोटिस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। ग्राम पंचायत द्वारा एक बुजुर्ग निवासी को अवैध कब्जा हटाने का नोटिस दिए जाने के बाद अब मामला कानूनी मोड़ ले चुका है। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने पंचायत की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए विधिक नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई रोकने की चेतावनी दी है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम चंगोरी निवासी 60 वर्षीय शिवप्रसाद निषाद को 24 अप्रैल 2026 को ग्राम पंचायत की ओर से नोटिस जारी कर 30 अप्रैल तक कथित अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया था कि यदि तय समय सीमा तक कब्जा नहीं हटाया गया तो 2 मई 2026 को प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए निर्माण को तोड़ दिया जाएगा। पंचायत ने इसे अंतिम नोटिस बताते हुए पहले भी तीन बार सूचना दिए जाने का दावा किया है।

वहीं, शिवप्रसाद निषाद की ओर से अधिवक्ता कमल देशमुख ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा है कि नोटिस में न तो भूमि का स्पष्ट विवरण दिया गया है और न ही क्षेत्रफल का उल्लेख है। अधिवक्ता का आरोप है कि बिना किसी जांच-पड़ताल और प्रमाण के इस प्रकार की कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि इस तरह दबाव बनाकर उनके पक्षकार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

अधिवक्ता ने पंचायत को भेजे गए विधिक नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए आगे कोई कार्रवाई की गई तो उनके पक्षकार को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में होने वाले समस्त न्यायालयीन खर्च और हर्जाने की जिम्मेदारी संबंधित पंचायत कार्यालय की होगी।

दूसरी ओर, ग्राम पंचायत का पक्ष है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा पूर्व में भी अतिक्रमण किया गया है और कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया। पंचायत का कहना है कि प्रशासनिक नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना उनकी जिम्मेदारी है।

इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और गांव में भी इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ पंचायत अपने अधिकारों की बात कर रही है, तो दूसरी ओर पीड़ित पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देकर कार्रवाई को गलत ठहरा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवाद को किस तरह सुलझाता है या मामला अदालत तक पहुंचता है।

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