मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप, बोला- दहेज और पैसों की मांग पूरी न होने पर वर्षों से हो रहा था उत्पीड़न; दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया

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रायसेन/भोपाल। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के उमराबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम तिलेंडी में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के मायके पक्ष ने आरोप लगाया है कि वर्षों से ससुराल पक्ष द्वारा दहेज और पैसों की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। अब संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद परिजन इसे सुनियोजित हत्या बता रहे हैं और निष्पक्ष जांच तथा आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

परिजनों के अनुसार, मृतका रेणुका अहिरवार की शादी वर्ष 2013 में ग्राम जिलेंडी निवासी धर्मेंद्र अहिरवार से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं, जिनमें पुत्र बालवीर और पुत्री सोनम शामिल हैं। मृतका के भाई संजय अहिरवार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 25 जून 2026 को दोपहर करीब तीन बजे उन्हें धर्मेंद्र के जीजा ज्ञान सिंह का फोन आया, जिसमें रेणुका की मौत की सूचना दी गई। फोन पर बताया गया कि इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई। सूचना मिलते ही परिवार मौके पर पहुंचा, जहां रेणुका का शव घर में रखा मिला। परिजनों का कहना है कि उन्हें मौत की परिस्थितियों की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

मृतका के पिता नारायण अहिरवार ने आरोप लगाया कि बीते दो से तीन वर्षों से रेणुका को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका कहना है कि ससुराल पक्ष बार-बार मायके से पैसों की मांग करता था। जब मांग पूरी नहीं होती थी, तब रेणुका के साथ मारपीट, गाली-गलौज और उत्पीड़न किया जाता था। परिजनों का आरोप है कि घर निर्माण के दौरान भी मृतका के पिता प्रेमनारायण अहिरवार ने लगभग एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी, इसके बावजूद पैसों की मांग और प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका।

परिवार का आरोप है कि धर्मेंद्र अहिरवार नशे का आदी था और नशे की हालत में अक्सर पत्नी के साथ मारपीट करता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि शव पर कई स्थानों पर चोट के निशान दिखाई दिए, जिससे उन्हें संदेह है कि रेणुका की हत्या की गई है।

मृतका के मायके पक्ष का कहना है कि दोनों मासूम बच्चे फिलहाल पिता के पास हैं और वे भय के माहौल में रहने के कारण खुलकर कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। परिजनों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है और प्रशासन से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

परिजनों का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अब प्रशासन और शासन से निष्पक्ष जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो जाएगी।

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