अंबाला। हरियाणा के अंबाला से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद बेटी के जन्म को लेकर उसे लगातार प्रताड़ित किया गया। घरेलू हिंसा और मारपीट के बाद उसे छह माह की मासूम बच्ची के साथ घर से निकाल दिया गया। इसके बाद पति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, लेकिन पत्नी होने के बावजूद उसे न तो अंतिम दर्शन करने दिए गए और न ही पति के निधन की सूचना समय पर दी गई।
पीड़िता प्रीतकौर के अनुसार, उसकी पहली शादी वर्ष 2019 से पहले हुई थी, लेकिन पहले पति के नशे की लत के कारण शादी महज 20 दिन में टूट गई। इसके बाद वर्ष 2019 में उसकी शादी रामलाल से हुई। शादी के कुछ समय बाद एक बेटी का जन्म हुआ। पीड़िता का आरोप है कि बेटी के जन्म के बाद सास, ससुर, देवर और अन्य ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे ताने देने शुरू कर दिए। उस पर लड़की पैदा करने को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
महिला का कहना है कि विवाद बढ़ने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे छह माह की मासूम बच्ची के साथ घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद उसे ससुराल में दोबारा प्रवेश नहीं करने दिया गया। उसका आरोप है कि उसे किसी प्रकार की आर्थिक सहायता भी नहीं दी गई और वह अपनी बेटी के साथ संघर्षपूर्ण जीवन जीने को मजबूर हो गई।
पीड़िता के मुताबिक, कुछ समय बाद उसे अन्य लोगों से यह जानकारी मिली कि उसके पति रामलाल की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। महिला का आरोप है कि ससुराल पक्ष ने जानबूझकर उसे पति के निधन की सूचना नहीं दी। इतना ही नहीं, उसे अंतिम दर्शन करने का अवसर भी नहीं मिला, जिससे उसे गहरा मानसिक आघात पहुंचा।
अब प्रीतकौर का कहना है कि वह केवल अपने और अपनी बेटी के वैधानिक अधिकार चाहती है। उसका आरोप है कि ससुराल पक्ष उसे पत्नी का दर्जा स्वीकार नहीं कर रहा और न ही उसकी बेटी को उसके पिता की संतान होने के अधिकार दिए जा रहे हैं। महिला का कहना है कि उसे आज तक न्याय नहीं मिला है।
पीड़िता ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उसका कहना है कि यदि उसकी शादी कानूनी रूप से हुई थी, तो उसे पत्नी के रूप में मिलने वाले सभी वैधानिक अधिकार और उसकी बेटी को पिता की संपत्ति एवं अन्य कानूनी अधिकार दिलाए जाएं। उसने जिला प्रशासन और पुलिस से मामले में तत्काल संज्ञान लेकर न्याय दिलाने की अपील की है।

