संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के थाना रजपुरा क्षेत्र में जमीन विवाद का मामला अब गरीब मजदूर परिवार बनाम प्रभावशाली पक्ष की लड़ाई बनता नजर आ रहा है। पंचायत में समझौता होने के बावजूद पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि विपक्षी पक्ष फर्जी कागजात तैयार कर उनकी खड़ी फसल वाली जमीन पर कब्जा कर चुका है। परिवार का कहना है कि यही खेत उनके जीवनयापन का एकमात्र सहारा था और अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
मामला ग्राम रजपुरा का है, जहां मजदूरी कर किसी तरह परिवार पालने वाले रामसेवक और उनके परिजनों का गांव के ही कुछ लोगों के साथ जमीन को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा था। बताया गया कि मामला थाना रजपुरा तक पहुंचा था, जिसके बाद गांव के बुजुर्गों, रिश्तेदारों और पंचों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था।
समझौते में साफ तौर पर तय हुआ था कि राजाराम और रामसेवक अपने हिस्से की जमीन पर कब्जा रखेंगे और विपक्षी पक्ष का उस खेत से कोई संबंध नहीं रहेगा। दोनों पक्षों ने लिखित रूप से समझौते को स्वीकार भी किया था। इसके बावजूद अब पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्षी पक्ष ने दोबारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन पर कब्जा कर लिया।
परिवार का आरोप है कि खेत में गेहूं की खड़ी फसल लगी हुई थी, लेकिन उसी दौरान जबरन कब्जा कर लिया गया। पीड़ितों का कहना है कि उनके पास खेती के लिए यही एकमात्र जमीन थी और इसी से पूरे परिवार का पालन-पोषण होता था। अब जमीन हाथ से निकलने के बाद परिवार आर्थिक संकट में पहुंच गया है।
पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष सरकारी कर्मचारी है, जिसकी वजह से उन्हें प्रशासनिक स्तर पर दबाव और प्रभाव का सामना करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि वे गरीब मजदूर लोग हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रभावशाली और सरकारी नौकरी करने वाले लोग हैं, इसलिए उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
आरोप है कि कई बार थाना रजपुरा में शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार लगातार थाने और अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन सुनवाई न होने से उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है। गांव में भी इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और ग्रामीण प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पंचायत में लिखित समझौता हो चुका था, तब दोबारा कब्जे की घटना बेहद गंभीर है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो मामला और अधिक बिगड़ सकता है।
फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। परिवार का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो उनकी पैतृक जमीन पूरी तरह हाथ से निकल जाएगी और उनके सामने भूखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

