देवरिया में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर खूनी संघर्ष, महिला का सिर फूटा, परिवार बोला- जमीन माफियाओं और पुलिस ने जीना हराम कर दिया

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देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भलुअनी थाना क्षेत्र स्थित ग्राम बंजरिया झंगटौर में सरकारी जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खूनी संघर्ष में बदलता नजर आ रहा है। गांव निवासी गोवर्धन राजभर और उनके परिवार ने गांव के कुछ लोगों पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने, घर बनाने से रोकने, जानलेवा हमला करने और पुलिस की मिलीभगत से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में घायल महिला ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का भी आरोप लगाया है, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

पीड़ित गोवर्धन राजभर का कहना है कि गांव में जमीन के हिस्से को लेकर पहले विवाद हुआ था, लेकिन बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया था। इसके बाद वह अपने हिस्से की जमीन पर मकान बनवाने की तैयारी कर रहे थे। आरोप है कि तभी गांव के ही कुछ दबंग लोग उमाशंकर, वासुदेव सिंह, रामप्रेम सिंह, नीलम सिंह और अन्य लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और जबरन निर्माण कार्य रुकवा दिया।

गोवर्धन का आरोप है कि दबंगों ने उन्हें घेरकर गाली-गलौज की, मारपीट पर उतारू हो गए और जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, परिवार को गांव से भगाने तक की कोशिश की जा रही है। पीड़ित का कहना है कि सुलह के दस्तावेज होने के बावजूद दबंग पक्ष उनकी एक नहीं सुन रहा और लगातार दबाव बना रहा है।

मामले ने और गंभीर रूप तब ले लिया जब गोवर्धन की पत्नी सरस्वती देवी ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि 21 मई 2026 की रात करीब 9:30 बजे मीरा देवी, चंदन, संदीप, शुभम और पिंकी समेत कई लोग एक राय होकर उनके घर पर चढ़ आए। आरोप है कि सभी लोगों ने लोहे की रॉड और ईंट से हमला कर दिया, जिसमें सरस्वती देवी के सिर पर गंभीर चोट आई और हाथ-पैर भी जख्मी हो गए।

पीड़िता का कहना है कि जान बचाने के लिए वह घर के अंदर भागी, लेकिन आरोपियों ने घर में घुसकर उन्हें बाहर खींच लिया और दोबारा हमला किया। आरोप है कि चंदन ने ईंट मारकर उनका सिर फोड़ दिया। घटना के बाद जब परिवार थाने पहुंचा तो पुलिस ने न तो मेडिकल कराया और न ही कोई मुकदमा दर्ज किया।

वहीं गोवर्धन राजभर ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि गांव की आराजी संख्या 303 की सरकारी भूमि पर मीरा देवी और उसके सहयोगी अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि उपजिलाधिकारी बरहज के आदेश के बावजूद थाना भलुअनी पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उनके परिवार का ही शांति भंग में चालान कर दिया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि सरकारी जमीन बचाने की कोशिश करने पर उन्हें ही प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि कब्जा करने वालों को संरक्षण मिल रहा है। परिवार ने पुलिस पर पक्षपात करने और दबंगों के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।

गांव में इस विवाद को लेकर भारी तनाव बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की तो मामला और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय और सुरक्षा की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।

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