BRICS समिट के बाद भारत-अमेरिका की सैन्य जुगलबंदी! 700 सैनिकों के साथ युद्ध की नई तकनीक और रणनीति का अभ्यास

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BRICS समिट के बाद भारत और अमेरिका की सेनाएं ‘युद्ध अभ्यास 2026’ में साथ मिलकर युद्ध की नई तकनीक और रणनीति का अभ्यास कर रही हैं। 15 से 28 सितंबर तक चलने वाले इस अभ्यास में करीब 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।
BRICS समिट के बाद अब भारत और अमेरिका की सेनाएं एक और बड़े रणनीतिक अभ्यास में आमने-सामने नहीं, बल्कि कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध की नई तकनीक और नई रणनीति का अभ्यास कर रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच होने वाला 22वां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ 15 सितंबर से और 28 सितंबर तक चलेगा। इस बार यह अभ्यास बेहद खास है, क्योंकि पहली बार एक ही एक्सरसाइज को दो बिल्कुल अलग-अलग ऑपरेशनल थिएटरों में कराया जा रहा है, एक तरफ राजस्थान का गर्म रेगिस्तान और दूसरी तरफ उत्तराखंड का ऊंचाई वाला पहाड़ी इलाका।

एक चरण राजस्थान के बीकानेर के पास महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हो रहा है, जहां दोनों देशों के सैनिक रेगिस्तानी इलाके में लॉन्ग-रेंज फायर, प्रिसीजन स्ट्राइक, मैन्युवर और संयुक्त ऑपरेशन का अभ्यास कर रहे हैं। वहीं, अभ्यास की शुरुआत भारतीय और अमेरिकी सैनिकों के औली, उत्तराखंड पहुंचने के साथ हो रही है। यहां फोकस हाई-ऑल्टिट्यूड वॉरफेयर, कठिन पहाड़ी इलाके में ऑपरेशन, एयर मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स पर रहेगा। औली एलएसी से लगभग 95 किलोमीटर की दूरी पर है।

करीब 700 सैनिक ले रहे हैं हिस्सा
इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में करीब 700 सैनिक, दोनों देशों से लगभग 350-350 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। इस बार एक और बड़ी खासियत है काउंटर-ड्रोन वॉरफेयर। पहली बार अमेरिकी Mobile Low, Slow, Small Unmanned Aircraft Integrated Defeat System यानी MLIDS को भारत में इस अभ्यास के दौरान तैनात किया जा रहा है। यानी ड्रोन से आने वाले खतरे को पहचानने, ट्रैक करने और उसे निष्क्रिय करने की क्षमताओं का भी दोनों सेनाएं अभ्यास करेंगी।
युद्ध अभ्यास में Command Post Exercise, Field Training Exercise और Combined Live-Fire Demonstration जैसे चरण भी शामिल हैं। इसका मकसद सिर्फ हथियार चलाना नहीं, बल्कि दोनों सेनाओं के कमांड, कम्युनिकेशन, फायर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं में इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना है।

नई टेक्नोलॉजी और युद्ध के अनुभव होंगे साझा
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अभ्यास में दोनों सेनाएं अपनी-अपनी नई टेक्नोलॉजी, हथियार प्रणालियों और युद्ध के अनुभव को एक-दूसरे के साथ साझा कर रही हैं। हाल के युद्धों में ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, प्रिसीजन फायर और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन जिस तरह निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, युद्ध अभ्यास का यह संस्करण उन्हीं बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप दिखाई देता है।

अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर भी होंगे शामिल
अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर भी इस अभ्यास के महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होने वाले हैं, जो भारत-अमेरिका के बढ़ते रक्षा सहयोग का संकेत है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इस अभ्यास में उनकी मौजूदगी दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को रेखांकित करती है।
2004 से जारी है युद्ध अभ्यास
भारत और अमेरिका के बीच युद्ध अभ्यास की शुरुआत 2004 में हुई थी और तब से यह दोनों सेनाओं के बीच वार्षिक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में जारी है। यह अभ्यास बारी-बारी से भारत और अमेरिका में आयोजित होता रहा है। लेकिन 2026 का युद्ध अभ्यास इसलिए खास है, क्योंकि पहली बार एक ही अभ्यास में हिमालय से लेकर राजस्थान तक युद्ध की अलग-अलग परिस्थितियों को शामिल की गई हैं।

यानी एक तरफ पाकिस्तान सीमा के करीब राजस्थान का खुला रेगिस्तानी युद्धक्षेत्र और दूसरी तरफ चीन सीमा के करीब उत्तराखंड का हाई-ऑल्टिट्यूड इलाका। भारत और अमेरिका की सेनाएं इस बार दो अलग-अलग युद्धक्षेत्रों में अपनी जॉइंटनेस, इंटरऑपरेबिलिटी और आधुनिक युद्ध क्षमता को परख रही हैं।

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