भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले के उच्चैन थाना क्षेत्र अंतर्गत जयचौली गांव में जमीन विवाद को लेकर तनाव गहराता जा रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि न्यायालय और प्रशासन की ओर से स्थगन आदेश जारी होने के बावजूद दबंग पक्ष विवादित भूमि पर जबरन कब्जा करने और पक्का निर्माण कराने में जुटा हुआ है। विरोध करने पर मारपीट, महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार, घर में घुसकर नकदी ले जाने तथा जान से मारने की धमकियां देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।
पीड़ित लालसिंह और उनके पुत्र लवकुश के अनुसार ग्राम जयचौली स्थित खसरा संख्या 802/0.40 में उनका वैधानिक हिस्सा है। परिवार का आरोप है कि गांव के ही कुछ लोगों ने विवादित भूमि पर जबरन कब्जा करने की नीयत से नींव खोदकर पक्का निर्माण कार्य शुरू कर दिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो कथित रूप से गाली-गलौज की गई और मारपीट करने की धमकी दी गई। भय के कारण उन्हें मौके से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी।
परिवार का कहना है कि इस भूमि को लेकर पहले से विवाद चल रहा है और प्रशासनिक स्तर पर स्थगन आदेश भी जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद आरोपी पक्ष कथित रूप से आदेशों की अनदेखी कर लगातार निर्माण कार्य कर रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि प्रभाव और दबंगई के बल पर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब 18 दिसंबर 2024 को घर की मरम्मत के दौरान विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। शिकायत के अनुसार, रंजीत, लोकेन्द्र, अनूप, लोकेश, पुष्पेन्द्र, मोरध्वज समेत कई लोग लाठी, डंडे और सरिया लेकर पहुंचे और हमला कर दिया। आरोप है कि अनूप ने सरिया से सिर पर वार करने का प्रयास किया, जिसे रोकने के दौरान लवकुश के हाथ में चोट आई। वहीं अन्य लोगों ने डंडों से मारपीट कर घायल कर दिया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि शोर सुनकर बचाव के लिए पहुंची महिलाओं के साथ भी अभद्रता की गई। शिकायत में कहा गया है कि लवकुश की पत्नी नीरज को बाल पकड़कर जमीन पर पटक दिया गया तथा उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। वहीं परिवार की बुजुर्ग महिला के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस घटना के बाद परिवार में भय और आक्रोश का माहौल है।
इतना ही नहीं, पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि हमले के दौरान कुछ लोग जबरन घर में घुस गए और संदूक में रखी करीब 50 हजार रुपये की नकदी निकाल ले गए। जाते-जाते कथित रूप से पूरे परिवार को गांव छोड़ने और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पीड़ितों का कहना है कि आरोपी पक्ष के लोग लगातार दबाव बना रहे हैं और समझौते के लिए मजबूर कर रहे हैं।
परिवार ने यह भी दावा किया है कि वर्षों पहले उनके ताऊ विशन द्वारा केवल स्टांप पेपर के माध्यम से जमीन का लेन-देन किया गया था, लेकिन विधिवत रजिस्ट्री नहीं कराई गई। अब ताऊ के निधन के बाद इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग जमीन पर स्थायी कब्जा करने और मकान निर्माण कराने की कोशिश कर रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
फिलहाल पीड़ित परिवार ने प्रशासन, पुलिस और राजस्व विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, विवादित भूमि पर निर्माण कार्य रुकवाने, सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। गांव में इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

