जौनपुर के निजी नर्सिंग होम पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप, रात में तेज दर्द होने पर दोबारा अस्पताल पहुंची तो ऑपरेशन किया गया; परिजनों ने इलाज में लापरवाही की जांच की मांग की
जौनपुर उत्तर प्रदेश। जौनपुर में IVF के जरिए संतान प्राप्ति के लिए इलाज करा रहे एक दंपती ने निजी नर्सिंग होम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता रितिका रायका का कहना है कि उन्होंने अपने पति सुमन राय के साथ मिलकर संतान प्राप्ति के लिए IVF उपचार कराया था। इस उपचार में करीब 10 लाख रुपए खर्च होने का दावा किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि गर्भावस्था के आठवें महीने में इलाज के दौरान ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिसके बाद ऑपरेशन के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।
पीड़िता के अनुसार, वह IVF उपचार के बाद नियमित जांच करा रही थीं। गर्भावस्था के आठवें महीने में चेकअप के लिए अस्पताल पहुंचने पर उन्होंने डॉक्टर से जांच कराने की बात कही। रितिका का कहना है कि इसके बाद अस्पताल में उन्हें दर्द का एक इंजेक्शन दिया गया और वह घर वापस चली गईं।
रात में अचानक बढ़ा दर्द, फिर अस्पताल पहुंची
पीड़िता के मुताबिक, अस्पताल से घर लौटने के बाद रात में अचानक उनके पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। दर्द बढ़ने पर परिवार उन्हें दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचा। महिला का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद गर्भ में बच्चे की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई।
रितिका का कहना है कि बाद में बच्चे की मूवमेंट महसूस नहीं हो रही थी। इसके बाद अस्पताल में ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। महिला के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।
10 लाख रुपए खर्च करने का दावा, अलग से भी दिए पैसे
पीड़िता का कहना है कि IVF उपचार के लिए उन्होंने करीब 10 लाख रुपए खर्च किए थे। इसके अलावा अस्पताल में इलाज और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर करीब 40 से 45 हजार रुपए अलग से दिए जाने का भी दावा किया गया है।
रितिका का आरोप है कि इतने बड़े खर्च के बावजूद उन्हें और उनके परिवार को बच्चे की मौत का सदमा झेलना पड़ा। उनका कहना है कि यदि समय रहते बच्चे की स्थिति की सही निगरानी की जाती और उचित चिकित्सा निर्णय लिया जाता तो शायद यह स्थिति नहीं आती।
इलाज में लापरवाही का आरोप, जांच की मांग
पीड़िता ने अस्पताल में इलाज के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आठवें महीने में अस्पताल पहुंचने पर उन्हें कौन सा इंजेक्शन दिया गया, उस समय बच्चे की स्थिति क्या थी और घर भेजने से पहले आवश्यक चिकित्सकीय जांच की गई थी या नहीं।
परिवार यह भी जानना चाहता है कि रात में दोबारा अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चे की मूवमेंट क्यों बंद हुई और ऑपरेशन के दौरान बच्चे की मौत किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में हुई।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी
पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन या संबंधित चिकित्सक का पक्ष इस शिकायत में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इलाज में वास्तव में चिकित्सा लापरवाही हुई या बच्चे की मौत किसी चिकित्सकीय जटिलता के कारण हुई, इसकी पुष्टि विशेषज्ञ जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकेगी।
पीड़िता ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्होंने संतान की उम्मीद में वर्षों की बचत और करीब 10 लाख रुपए खर्च किए थे, लेकिन अब बच्चे को खोने के बाद वे जवाब चाहते हैं कि आखिर इलाज के दौरान ऐसी स्थिति कैसे बनी

