मथुरा में मजदूर से 48 हजार की मजदूरी मांगना पड़ा भारी, भुगतान मांगने पर दबंगों ने की मारपीट, गले में अंगोछा डाल 50 फीट तक घसीटने का आरोप, जातिसूचक गालियां देने का भी दावा

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मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद से मजदूरों के शोषण और कथित जातीय उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है। थाना मांट क्षेत्र के शिवनगर चौकड़ा निवासी जगजीवन ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सहित पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोप लगाया है कि मकान निर्माण का कार्य पूरा कराने के बाद जब उन्होंने अपनी मेहनत की मजदूरी मांगी तो न केवल भुगतान से इनकार कर दिया गया, बल्कि उनके साथ मारपीट, जान से मारने की कोशिश और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग भी किया गया। पीड़ित का कहना है कि इस घटना के बाद वह और उनका परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।

पीड़ित जगजीवन ने बताया कि वह पेशे से राजमिस्त्री हैं और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके अनुसार थाना यमुनापार क्षेत्र के गांव भूतिया निवासी छोटू पुत्र बनी सिंह तथा सचिन उर्फ गूंगा पुत्र बनी सिंह ने अपने मकान का निर्माण कार्य उन्हें सौंपा था। मजदूरी के रूप में राजमिस्त्री के लिए 850 रुपये प्रतिदिन और बेलदार के लिए 650 रुपये प्रतिदिन तय किए गए थे। जगजीवन के साथ एक अन्य राजमिस्त्री और तीन बेलदार लगातार निर्माण कार्य में लगे रहे। शुरुआत में भुगतान समय-समय पर किया गया, लेकिन बाद में मजदूरी रोक दी गई।

पीड़ित का आरोप है कि जब लगभग दो सप्ताह का कार्य पूरा हो गया और करीब 48 हजार रुपये की मजदूरी बकाया हो गई, तब उन्होंने भुगतान की मांग की। आरोप है कि पहले उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि परिवार का सदस्य विदेश से आने वाला है, उसके बाद पूरा हिसाब कर दिया जाएगा। बाद में बार-बार पैसे मांगने पर भी केवल आश्वासन दिया जाता रहा और भुगतान नहीं किया गया।

जगजीवन का कहना है कि 7 जुलाई 2026 को वह अपने भाई के साथ दोबारा बकाया मजदूरी मांगने पहुंचे। आरोप है कि इसी दौरान छोटू और सचिन उर्फ गूंगा ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर दोनों ने कथित रूप से लात-घूंसों से मारपीट की। पीड़ित का दावा है कि आरोपियों ने उनके गले में अंगोछा डालकर फंदा बनाया और करीब 50 फीट तक घसीटा। इस दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी गई। किसी तरह उनके भाई ने बीच-बचाव कर उन्हें बचाया।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि पहले यह तय हुआ था कि प्रत्येक तीन दिन में मजदूरी का भुगतान किया जाएगा, लेकिन बाद में आठ-आठ दिन तक पैसे दिए गए और अंततः पूरी मजदूरी रोक ली गई। उनका कहना है कि लगातार भरोसा दिलाकर उनसे काम कराया गया और अंत में भुगतान देने से साफ इनकार कर दिया गया।

जगजीवन का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने थाना स्तर पर शिकायत भी दी, लेकिन वह इतने भयभीत हैं कि जिस स्थान पर निर्माण कार्य किया था, वहां दोबारा जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उनका आरोप है कि उन्हें फोन कर उसी स्थान पर बुलाया जा रहा है, जबकि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर बुलाकर बयान दर्ज किया जाए और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

पीड़ित ने मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन से आरोपियों के विरुद्ध मारपीट, धमकी, जातीय उत्पीड़न तथा बकाया मजदूरी नहीं देने के मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उनकी तथा उनके साथ काम करने वाले मजदूरों की बकाया मजदूरी दिलाने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।

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