समुद्र में भारत की नई ताकत ‘मातंगी’, बिना इंसान के 1500 KM का सफर तय करने वाला स्वदेशी ऑटोनॉमस ड्रोन बोट

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देश में निर्मित पहली ऑटोनोमस सरफेस बोट मातंगी भारत की समुद्री क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह बिना किसी इंसान के सवार हुए समुद्र में लंबी दूरी तय करने में सक्षम है। भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक में मानवरहित प्रणालियों के विकास की दिशा में ‘वरुणा’ ड्रोन भी एक अहम पहल है।
भारत रक्षा क्षेत्र में नेक्स्ट जेनरेशन तकनीक और स्वदेशी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में स्वदेशी तकनीक से विकसित ‘मातंगी’ ऑटोनॉमस सरफेस वेसल (ASV) भारत की समुद्री क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सागर डिफेंस इंजीनियरिंग द्वारा विकसित मातंगी एक ऐसा मानवरहित सतही पोत है, जो बिना किसी इंसान के सवार हुए समुद्र में लंबी दूरी तय करने में सक्षम है।

बिना क्रू के ही ‘मातंगी’ ने तय कर लिया 1500 KM का सफर
वर्ष 2024 में इसने मुंबई से तमिलनाडु के तूतीकोरिन तक लगभग 1,500 किलोमीटर की यात्रा बिना मानवीय हस्तक्षेप के पूरी की थी। मातंगी में स्वायत्त नेविगेशन और टक्कर से बचने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। ऐसी प्रणालियां समुद्र में पोत की दिशा निर्धारित करने, आसपास की परिस्थितियों को समझने और सुरक्षित संचालन में मदद कर सकती हैं।

इंसान को लेकर उड़ने वाला देश का पहला ड्रोन ‘वरुणा’
भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक में मानवरहित प्रणालियों के विकास की दिशा में एक अहम पहल है ‘वरुणा’ ड्रोन। पुणे की कंपनी सागर डिफेंस इंजीनियरिंग द्वारा विकसित यह एक पायलटलेस एरियल व्हीकल है, जिसे एक व्यक्ति को लेकर उड़ान भरने के लिए तैयार किया गया है। जुलाई 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना के स्वावलंबन कार्यक्रम के दौरान वरुणा ड्रोन का प्रदर्शन देखा था। इस तकनीक ने भविष्य में मानव परिवहन के लिए मानवरहित हवाई प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की संभावनाओं को सामने रखा।

वरुणा की खासियत-
150 किलो तक पेलोड ले जाने की क्षमता/ वरुणा को एक व्यक्ति को हवा में ले जाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इसकी पेलोड क्षमता लगभग 150 किलोग्राम बताई गई है।
इसमें ऑटोनॉमस टेक-ऑफ और लैंडिंग जैसी क्षमताएं भी शामिल हैं।
समुद्र में युद्धपोतों के बीच जरूरी सामान पहुंचाना, आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता देना और भविष्य में मेडिकल इवैक्युएशन जैसे कार्य इस प्रकार की तकनीक के संभावित इस्तेमाल में शामिल हो सकते हैं।
समुद्र में पारंपरिक परिवहन के विकल्प के तौर पर ऐसे प्लेटफॉर्म नौसेना की लॉजिस्टिक क्षमताओं को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
इस ड्रोन को सागर डिफेंस ने तैयार किया हैं और ये भारतीय नौसेना का हिस्सा हैं।
1.18 लाख फीट से लॉन्च हो सकता है भारत का स्वदेशी स्ट्रैटोस्फेरिक UAV
भारत रक्षा क्षेत्र में अगली पीढ़ी की मानवरहित तकनीक विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी कड़ी में भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप कलाम लैब्स (Kalam Labs) ने एक स्ट्रैटोस्फेरिक UAV विकसित किया है, जिसे गुब्बारे आधारित प्लेटफॉर्म की मदद से अत्यधिक ऊंचाई से लॉन्च करने की अवधारणा पर तैयार किया गया है।

कंपनी के अनुसार, यह UAV 1,18,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर मौजूद बैलून प्लेटफॉर्म से छोड़ा जा सकता है। इतनी ऊंचाई से लॉन्च करने की अवधारणा इसे पारंपरिक ड्रोन प्रणालियों से अलग बनाती है।

वहीं आपको बता दें कि हाल ही में भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत INS विक्रांत से गोवा में राफेल-M लड़ाकू विमानों के फाइनल ट्रायल किए गए।

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