पानीपत में मजदूर की मेहनत की कमाई पर संकट, कंबल कंपनी पर 17 हजार रुपये रोकने का आरोप; फिरोज आलम ने लगाई बकाया वेतन दिलाने की गुहार

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पानीपत। हरियाणा के पानीपत में काम करने वाले बिहार के किशनगंज निवासी फिरोज आलम ने एक कंपनी पर मेहनत की कमाई का बकाया वेतन रोकने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने कंबल बनाने के काम में करीब छह से सात महीने तक मेहनत की, लेकिन अब कंपनी की ओर से उनका पूरा भुगतान नहीं किया जा रहा है। फिरोज आलम के मुताबिक, उन्हें हर महीने 23 हजार रुपये वेतन मिलने की बात थी। इसके बावजूद उनके वेतन में से केवल पांच हजार रुपये दिए गए और शेष 17 हजार रुपये कथित तौर पर रोक लिए गए। अब पीड़ित अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए गुहार लगा रहे हैं।

फिरोज आलम ने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले हैं और रोजगार की तलाश में हरियाणा के पानीपत-करनाल क्षेत्र में काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो से तीन वर्षों से इस क्षेत्र में काम करते रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने अलीशा नाम से बताई गई कंपनी में कंबल बनाने का काम किया। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने कंपनी में करीब छह से सात महीने तक काम किया और इस दौरान नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उनका कहना है कि काम पूरा करने के बावजूद वेतन का पूरा भुगतान नहीं हुआ।

पीड़ित फिरोज आलम के मुताबिक, कंपनी में उनका मासिक वेतन 23 हजार रुपये तय था। उनका आरोप है कि भुगतान के समय उन्हें केवल पांच हजार रुपये दिए गए, जबकि बाकी 17 हजार रुपये अब तक नहीं मिले हैं। फिरोज का कहना है कि यह राशि उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। कई दिनों तक काम करने के बाद भी जब पूरी मजदूरी नहीं मिली तो उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई।

फिरोज आलम का कहना है कि किसी जरूरी काम से उन्हें अपने घर जाना पड़ा था। उनके अनुसार, घर जाने के बाद कंपनी की ओर से उनका बकाया भुगतान रोक लिया गया। पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने काम के बदले मिलने वाले वेतन की मांग की, लेकिन अब तक उन्हें उनकी पूरी रकम नहीं मिल पाई है। उनका कहना है कि मजदूर के लिए रोजाना की कमाई ही परिवार की जरूरतें पूरी करने का मुख्य सहारा होती है। ऐसे में 17 हजार रुपये का भुगतान अटकने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

पीड़ित ने कंपनी के मालिक का नाम मन्नू बताया है, जो उनके अनुसार हरियाणा के रहने वाले हैं। फिरोज आलम की मांग है कि कंपनी प्रबंधन उनके काम का पूरा हिसाब करे और बकाया 17 हजार रुपये का भुगतान जल्द से जल्द करे। उनका कहना है कि उन्होंने कंपनी में काम करके अपनी जिम्मेदारी पूरी की है, इसलिए उन्हें उनकी मेहनत का पैसा मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए। हालांकि, कंपनी प्रबंधन का पक्ष और भुगतान रोकने के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

फिरोज आलम ने संबंधित अधिकारियों और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि मजदूरों को काम कराने के बाद उनका वेतन समय पर मिलना चाहिए, ताकि उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों के सामने परेशान न होना पड़े। पीड़ित चाहते हैं कि उनकी शिकायत पर सुनवाई हो और जांच के बाद उनका बकाया वेतन दिलाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में श्रम विभाग या पुलिस के पास कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं। कंपनी की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले के सभी पहलुओं की जांच और कंपनी प्रबंधन का पक्ष जानना जरूरी है। फिरोज आलम की मांग है कि उनकी मेहनत की कमाई के 17 हजार रुपये उन्हें समय रहते वापस दिलाए जाएं, ताकि वह आर्थिक परेशानी से उबर सकें।

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