फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के थाना जाफरगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बिन्दौर में पैतृक कृषि भूमि को लेकर विवाद अब गंभीर कानूनी और प्रशासनिक सवालों के घेरे में आ गया है। ग्राम बिन्दौर, पोस्ट जाफरगंज, तहसील बिंदकी के मूल निवासी गया प्रसाद शिवहरे ने आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक कृषि भूमि पर कब्जा करने के उद्देश्य से उनके नाम का फर्जी पहचान पत्र तैयार कर फर्जी इकरारनामा बनाया गया। पीड़ित का आरोप है कि न्याय की उम्मीद में उन्होंने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से लेकर जनसुनवाई पोर्टल तक कई बार शिकायत की, लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई होने के बजाय उन्हीं के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
गया प्रसाद शिवहरे, पुत्र रामबरन शिवहरे, वर्तमान में मुंबई में रहकर मजदूरी करते हैं। उनका आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति का लाभ उठाकर रामसहोदर सिंह पुत्र इन्द्रजीत सिंह तथा उनके पुत्र शक्ति सिंह और धनंजय सिंह ने उनकी पैतृक भूमि पर कब्जा करने की साजिश रची। आरोप है कि उनके नाम का फर्जी वोटर आईडी तैयार कराया गया और 20 जून 2015 को मात्र 10 रुपये के स्टांप पेपर पर फर्जी इकरारनामा तैयार कर दिया गया। कथित इकरारनामे में दर्शाया गया कि उन्होंने 11 लाख रुपये में अपनी भूमि बेचने की सहमति दी तथा एक लाख रुपये बतौर बयाना प्राप्त कर लिया।

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने कभी कोई इकरारनामा नहीं किया और न ही किसी प्रकार की धनराशि प्राप्त की। उनका दावा है कि जिस समय यह कथित इकरारनामा तैयार किया गया, उस समय वह मुंबई में थे और अस्पताल में भर्ती होकर उपचार करा रहे थे। अस्पताल के दस्तावेज इस बात का प्रमाण हैं कि वह उस समय फतेहपुर में मौजूद नहीं थे।
गया प्रसाद शिवहरे का आरोप है कि रामसहोदर सिंह, शक्ति सिंह और धनंजय सिंह ने उनकी पैतृक भूमि के हिस्से पर जबरन कब्जा कर रखा है। उन्होंने कई बार कब्जा हटाने का अनुरोध किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने शासन और प्रशासन के समक्ष शिकायतें दर्ज करानी शुरू कीं।
पीड़ित के अनुसार उन्होंने पूरे मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को लिखित रूप से दी थी। उनका कहना है कि उपमुख्यमंत्री कार्यालय से जाफरगंज थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी कमलेश कुमार को कथित फर्जी इकरारनामा तैयार कराने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन पीड़ित का आरोप है कि आदेश का पालन नहीं किया गया।
गया प्रसाद शिवहरे का आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी कमलेश कुमार ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पूरा मामला उल्टा कर दिया। उनका कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी, उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार के खिलाफ ही मारपीट का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि ऐसा उन्हें कानूनी लड़ाई से पीछे हटाने और दबाव बनाने के उद्देश्य से किया गया।
पीड़ित ने बताया कि न्याय के लिए उन्होंने लगातार जनसुनवाई पोर्टल और अन्य सरकारी माध्यमों से शिकायतें दर्ज कराईं। 5 फरवरी 2026 को आवश्यक कानूनी कार्रवाई कराने के संबंध में शिकायत दर्ज की गई, जिसका निस्तारण कर दिया गया। इसके बाद 26 मार्च 2026 को पैतृक जमीन पर जबरन कब्जा हटाने और आवश्यक कार्रवाई की मांग को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई, जिसे भी निस्तारित कर दिया गया। वहीं 2 जून 2026 को भूमि गाटा संख्या 242 एवं 255 के कथित फर्जी इकरारनामे के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने और अग्रिम कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई, जो अभी भी लंबित बताई जा रही है।
गया प्रसाद शिवहरे ने प्रशासन से मांग की है कि कथित फर्जी वोटर आईडी, इकरारनामा, स्टांप पेपर, हस्ताक्षरों तथा संबंधित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जाए। साथ ही उस समय के संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
फिलहाल यह मामला संबंधित विभागों और न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। समाचार में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता गया प्रसाद शिवहरे द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और उनके दावों पर आधारित हैं। आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने और सक्षम प्राधिकारी की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

