50 से 55 साल से रास्ता बंद होने का दावा, बरसात में भरता है पानी; जंगल के रास्ते आने-जाने को मजबूर परिवार ने प्रशासन से मांगा न्याय
विशेष संवाददाता कंचन की रिपोर्ट
गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में ग्राम समाज की जमीन और सार्वजनिक रास्ते पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। बाबा करमचंद तिवारी का आरोप है कि गांव में चकबंदी के समय से ही रास्ते को लेकर विवाद चला आ रहा है। उनके मुताबिक, करीब 50 से 55 वर्षों से रास्ते पर कब्जे की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण उन्हें और उनके परिवार को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित का कहना है कि वह वर्ष 2022 से लगातार अधिकारियों के पास शिकायतें लेकर जा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कराकर सार्वजनिक रास्ता खुलवाने और ग्राम समाज की जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
बाबा करमचंद तिवारी के अनुसार, गांव के मंसाराम पुत्र बहादुर, संतशरण पुत्र मंसाराम और पुरानचंद पुत्र संतशरण पर ग्राम समाज की जमीन तथा सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा करने का आरोप है। उनका कहना है कि रास्ते पर बांस-बल्लियां लगाकर आवागमन बाधित किया गया है और रास्ते के कुछ हिस्सों पर निर्माण किए जाने की भी शिकायत है। करमचंद तिवारी का दावा है कि इस विवाद के चलते गांव के लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की स्थिति स्पष्ट कराने और रास्ते की पैमाइश कराने की मांग की है।
पीड़ित का कहना है कि रास्ता बंद होने के कारण उनके परिवार की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। बरसात के मौसम में रास्ते पर पानी भर जाता है, जिससे सामान्य आवागमन भी मुश्किल हो जाता है। उनका आरोप है कि रास्ते की समस्या के कारण उन्हें जंगल की ओर से होकर गुजरना पड़ता है। इस रास्ते पर सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है। ऐसे में परिवार के सदस्यों को आने-जाने के दौरान अनहोनी की आशंका रहती है। करमचंद तिवारी का कहना है कि गांव में रहने के बावजूद उन्हें अपने घर तक पहुंचने के लिए सुरक्षित और सुगम रास्ता नहीं मिल पा रहा है।
करमचंद तिवारी ने आरोप लगाया कि विवाद के चलते उनके घर के दरवाजे के पास भी रोक-टोक की जाती है। उनका कहना है कि परिवार के सदस्यों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि रास्ते का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि वह संत समाज से जुड़े हैं, फिर भी उनके परिवार को राहत नहीं मिल रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
पीड़ित के मुताबिक, उन्होंने रास्ता खुलवाने और कथित कब्जा हटवाने के लिए थाना प्रभारी, उपजिलाधिकारी तथा अन्य अधिकारियों के समक्ष कई बार प्रार्थना-पत्र दिए हैं। उनका दावा है कि शिकायतें करने के बावजूद मौके पर स्थायी समाधान नहीं हो सका। उपलब्ध दस्तावेजों में 11 अप्रैल 2020 की एक शिकायत का भी उल्लेख मिलता है, जिसमें रास्ता बंद किए जाने और गाटा संख्या 199 से संबंधित विवाद उठाया गया था। इससे पहले से चली आ रही शिकायतों का संकेत मिलता है। करमचंद तिवारी का कहना है कि बाद के वर्षों में भी उन्होंने अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन उन्हें अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली।
शिकायतकर्ता ने जनसुनवाई के आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। उपलब्ध विवरण में आईजीआरएस शिकायत संख्या 40018326003775/3770 का उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि कई स्तरों पर आवेदन देने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। हालांकि, शिकायत की वर्तमान स्थिति, राजस्व विभाग की जांच और संबंधित अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
बाबा करमचंद तिवारी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचकर ग्राम समाज की जमीन और सार्वजनिक रास्ते की पैमाइश करें। राजस्व अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि जांच में सरकारी जमीन या सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जा पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि रास्ता खुलने से उनके परिवार के साथ-साथ अन्य ग्रामीणों को भी आवागमन में राहत मिल सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से चले आ रहे इस विवाद की निष्पक्ष जांच कब होगी और शिकायतकर्ता को राहत कब मिलेगी। करमचंद तिवारी ने प्रशासन से समय रहते हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि परिवार को सुरक्षित रास्ता मिल सके और ग्राम समाज की जमीन से जुड़े विवाद का कानूनी प्रक्रिया के तहत समाधान हो सके।
संपर्क सूत्र: 9984764978

