उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के रहने वाले धर्मेंद्र ने अपनी नौकरी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने ओएम फूड मैनेजमेंट सर्विसेज के माध्यम से करीब दो वर्षों तक एक फैक्ट्री में पूरी ईमानदारी और लगन के साथ काम किया। इस दौरान उनके काम को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं हुई। लेकिन बीमारी के कारण कुछ दिनों की छुट्टी लेने के बाद जब वह वापस ड्यूटी पर पहुंचे तो उन्हें फैक्ट्री में प्रवेश तक नहीं करने दिया गया। अब पिछले करीब दो महीनों से वह लगातार नौकरी पर वापस लिए जाने की उम्मीद में कंपनी और सुपरवाइजर के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें काम नहीं मिला है।
धर्मेंद्र के अनुसार उनके पास कंपनी द्वारा जारी कर्मचारी पहचान पत्र भी है, जिसमें उनका कर्मचारी क्रमांक ओएम 7792 दर्ज है। उनका कहना है कि अचानक उन्हें टाइफाइड हो गया था, जिसके कारण उन्होंने कंपनी को छुट्टी की जानकारी देकर लगभग पंद्रह दिनों के लिए अपने घर चले गए थे। इलाज पूरा होने और स्वास्थ्य ठीक होने के बाद वह दोबारा काम पर लौटे, लेकिन उनकी परेशानी यहीं से शुरू हो गई।
पीड़ित का आरोप है कि फैक्ट्री में तैनात सुपरवाइजर सुंदरलाल ने उन्हें अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। जब भी वह ड्यूटी जॉइन करने पहुंचे तो कभी अगले दिन आने को कहा गया, कभी दो दिन बाद आने का बहाना बनाकर वापस भेज दिया गया। धर्मेंद्र का कहना है कि यह सिलसिला एक-दो दिन नहीं बल्कि पिछले करीब दो महीनों से लगातार चल रहा है। उन्होंने कई बार फैक्ट्री जाकर अपनी नौकरी दोबारा शुरू कराने का अनुरोध किया, लेकिन हर बार उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के लौटा दिया गया।
धर्मेंद्र का कहना है कि उन्होंने कंपनी का कोई नियम नहीं तोड़ा और न ही बिना सूचना के काम छोड़ा था। उनका कहना है कि केवल बीमारी के कारण उन्हें छुट्टी लेनी पड़ी थी। ऐसे में स्वस्थ होकर लौटने के बाद भी नौकरी से दूर रखना उनके साथ अन्याय है। उनका आरोप है कि यदि कंपनी को उनसे कोई आपत्ति थी तो उन्हें लिखित रूप से जानकारी दी जानी चाहिए थी, लेकिन उन्हें आज तक कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
पीड़ित ने बताया कि वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। पिछले दो महीनों से रोजगार बंद होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार नौकरी की तलाश और कंपनी के चक्कर लगाने के कारण वह मानसिक तनाव में भी हैं।
धर्मेंद्र ने संबंधित कंपनी प्रबंधन और श्रम विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि उन्होंने कंपनी के नियमों के अनुसार छुट्टी ली थी और बीमारी के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर काम पर लौटे थे, तो उन्हें दोबारा नौकरी पर रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी कर्मचारी को केवल बीमारी के कारण रोजगार से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।
अब यह मामला श्रमिकों के अधिकारों और कंपनियों में कर्मचारियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल श्रमिक के रोजगार के अधिकार से जुड़ा विषय है, बल्कि बीमारी के दौरान कर्मचारियों के प्रति अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। फिलहाल पीड़ित न्याय की उम्मीद में संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रहा है।

