‘वाइल्डलाइफ SOS’ के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण तेंदुए की खाल की तस्करी के मामले में मध्य प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों के सामने पेश हुए। उन्होंने कहा कि ‘वाइल्डलाइफ SOS’ जांच में पूरा सहयोग करेगा और मामले को स्पष्ट करने में अधिकारियों की मदद करेंगे।
मध्य प्रदेश: वाइल्डलाइफ SOS के को-फाउंडर और CEO कार्तिक सत्यनारायण सोमवार को वन अधिकारियों के सामने पेश हुए। यह मामला तेंदुए के शिकार और उसकी खाल की तस्करी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि वह और उनका संगठन पूरी तरह से बेगुनाह हैं और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने का भरोसा दिलाया। उत्तर प्रदेश के आगरा में तेंदुए की खाल जब्त होने की जांच के दौरान नाम सामने आने के बाद मध्य प्रदेश वन विभाग और स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने वाइल्डलाइफ SOS के को-फाउंडर और CEO कार्तिक सत्यनारायण से तेंदुए के शिकार और वन्यजीव तस्करी के मामले में 9 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की। यह मामला गाय तस्करी के बाद सामने आया है।
तेंदुए की खाल तस्करी मामले में कार्तिक सत्यनारायण की पेशी
यह पेशी सुप्रीम कोर्ट के 21 सितंबर के उस आदेश के बाद हुई, जिसमें सत्यनारायण को 28 सितंबर को सुबह 11 बजे वन अधिकारियों के सामने पेश होने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया था। पूछताछ के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सत्यनारायण ने कहा, ‘हम पूरी तरह से बेगुनाह हैं और हमें सच पर पूरा भरोसा है। हमें पता है कि सच सामने आएगा। हमारा मकसद वन विभाग की मदद करना है। हमारा मकसद जानकारी इकट्ठा करके वन विभाग तक पहुंचाना है ताकि वे वन्यजीव तस्करों को पकड़ सकें और वन्यजीवों की रक्षा कर सकें। हम उन्हें पूरी मदद और सहयोग देंगे।’
कार्तिक सत्यनारायण पर NGO कर्मचारी ने लगाया था आरोप
सत्यनारायण ने कहा कि वह सुबह 11 बजे से रात 8:30 बजे तक अधिकारियों के साथ रहे और जांच के लिए बुलाए जाने पर आगे भी उनके सामने पेश होते रहेंगे। अपने NGO के एक कर्मचारी द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए, सत्यनारायण ने कहा कि यह कोई साजिश या भ्रम और गलतफहमी है और वह इस मामले को साफ करने के लिए ही यहां आए हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे NGO के कर्मचारी कोई गलत काम नहीं करेंगे। इसके पीछे कोई और साजिश, कोई भ्रम या गलतफहमी है। हम उसी गलतफहमी को दूर करने के लिए यहां आए हैं, जब से यह मामला सामने आया है। हम अधिकारियों के सामने पेश होने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कानूनी सुरक्षा के मुद्दे के कारण इसमें देरी हुई।’
कार्तिक सत्यनारायण ने दी सफाई
सत्यनारायण ने फिर कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और पिछले 30-35 सालों से वन्यजीव संरक्षण ही उनके जीवन का मकसद रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। हम जानवरों से प्यार करने वाले लोग हैं। वन्यजीव संरक्षण हमेशा से हमारे जीवन का मकसद रहा है। पिछले 30-35 सालों से हम यही काम कर रहे हैं। हम वन विभाग के समर्थक हैं; वन विभाग हमारा परिवार है और हम हर संभव तरीके से उनकी मदद करेंगे। यही हमारे जीवन और हमारे NGO का मकसद है।’
कार्तिक सत्यनारायण को फंसाने की साजिश?
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि इस साजिश के पीछे कौन हो सकता है तो सत्यनारायण ने कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘अगर हमें इसके बारे में जानकारी होती तो हम इसे साफ कर देते। हमें नहीं पता कि इसके पीछे कौन है, लेकिन निश्चित रूप से कुछ भ्रम है, एक बड़ा भ्रम है, क्योंकि हमारा मकसद वन विभाग के काम में मदद और सहयोग करना है। हम पिछले 35 सालों से पूरे देश में यह काम कर रहे हैं।’
तेंदुए की खाल तस्करी मामला
यह मामला मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स द्वारा तेंदुए के अवैध शिकार की घटना की जांच से जुड़ा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी और उन्हें जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में गिरफ्तार किए गए वन्यजीवों की तस्करी के दो संदिग्धों ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर ‘वाइल्डलाइफ SOS’ के सह-संस्थापक और CEO कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिया था। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जांचकर्ता उन आरोपों की जांच कर रहे थे कि NGO के अवैध शिकार-रोधी अभियानों का इस्तेमाल जब्ती की कार्रवाई दिखाने और अपने संरक्षण प्रोफाइल को मजबूत करने के लिए किया गया था।
कार्तिक सत्यनारायण ने आरोपों को नकारा
हालांकि, सत्यनारायण ने किसी भी गलत काम से इनकार किया और कहा कि वह और उनका संगठन वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं और अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर के अपने आदेश में निर्देश दिया कि हाई कोर्ट का 2 सितंबर का आदेश संबंधित रिट याचिकाओं के निपटारे तक लागू रहेगा और सत्यनारायण को 28 सितंबर को वन अधिकारियों के सामने पेश होने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया।

